-
मलाल ये है कि ये!
मलाल ये है कि ये दोनों हाथ मेरे हैं,किसी की चीज़ किसी से छुपानी पड़ती है| हसीब सोज़
-
मुझे ख़रीदने ऐसे भी!
मुझे ख़रीदने ऐसे भी लोग आते हैं, कि जिन के कहने से क़ीमत घटानी पड़ती है| हसीब सोज़
-
शीशा टूट जाता है!
किसी से इश्क़ करते हो तो फिर ख़ामोश रहिएगा, ज़रा सी ठेस से वर्ना ये शीशा टूट जाता है| हसीब सोज़
-
मगर वो क्या करे!
तसल्ली देने वाले तो तसल्ली देते रहते हैं,मगर वो क्या करे जिस का भरोसा टूट जाता है| हसीब सोज़
-
बाहर के मधुबन से!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राम्स्वरूप सिंदूर जी का यह गीत – आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक गीत शेयर कर रहा…
-
न इतना शोर कर!
न इतना शोर कर ज़ालिम हमारे टूट जाने पर,कि गर्दिश में फ़लक से भी सितारा टूट जाता है| हसीब सोज़