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क़ीमत और बढ़ती है!
अगर बिकने पे आ जाओ तो घट जाते हैं दाम अक्सर,न बिकने का इरादा हो तो क़ीमत और बढ़ती है| नवाज़ देवबंदी
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अदावत और बढ़ती है!
ज़रूरत में अज़ीज़ों की अगर कुछ काम आ जाओ,रक़म भी डूब जाती है अदावत और बढ़ती है| नवाज़ देवबंदी
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वो दुश्मन क्यूँ न हो!
मिरी कमज़ोरियों पर जब कोई तन्क़ीद करता है,वो दुश्मन क्यूँ न हो उस से मोहब्बत और बढ़ती है| नवाज़ देवबंदी
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हक़ीक़त और बढ़ती!
बुझाने को हवा के साथ गर बारिश भी आ जाए,चराग़-ए-बे-हक़ीक़त की हक़ीक़त और बढ़ती है| नवाज़ देवबंदी
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कोई जब रास्ता रोके!
सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुरअत और बढ़ती है,कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है| नवाज़ देवबंदी
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आज फिर बादल घिरे हैं!
अपनी एक नई रचना आज शेयर कर रहा हूँ- आज फिर बादल घिरे हैं। हूँ नहीं वह यक्ष जिसकी यक्षिणी करती प्रतीक्षा, है नहीं संदेश कोई भेजने की तनिक इच्छा, हर दिशा में दिग्विजय के अश्व देते हैं दिखाई, और अपनी ही दशा पर आ रही फिर-फिर रुलाई, बालपन के करुण पल बन स्वप्न आंखों…