Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 21st Jul 2025

    जाते हो दरिया देखने!

    कमानों में खिंचे हैं तीर तलवारें हैं चमकी,ज़रा ठहरो कहाँ जाते हो दरिया देखने को| मंज़र भोपाली

  • 21st Jul 2025

    बहुत से आइना-ख़ाने!

    बहुत से आइना-ख़ाने हैं इस बस्ती में लेकिन,तरसती है हमारी आँख चेहरा देखने को| मंज़र भोपाली

  • 21st Jul 2025

    खड़े हैं राह चलते!

    खड़े हैं राह चलते लोग कितनी ख़ामुशी से,सड़क पर मरने वालों का तमाशा देखने को| मंज़र भोपाली

  • 21st Jul 2025

    गए थे शौक़ से हम!

    गए थे शौक़ से हम भी ये दुनिया देखने को,मिला हम को हमारा ही तमाशा देखने को| मंज़र भोपाली

  • 21st Jul 2025

    इशारे न पा सका!

    उन की नज़र के कोई इशारे न पा सका,मेरे जुनूँ की चारों तरफ़ धूम हो गई| असद भोपाली

  • 21st Jul 2025

    दुनिया ख़ुलूस ओ दर्द!

    क़ल्ब ओ ज़मीर बे-हिस ओ बे-जान हो गए,दुनिया ख़ुलूस ओ दर्द से महरूम हो गई| असद भोपाली

  • 21st Jul 2025

    हालात ने किसी से!

    हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे,अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई| असद भोपाली

  • 21st Jul 2025

    उनकी निगाह और भी

    जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई,उन की निगाह और भी मासूम हो गई| असद भोपाली

  • 21st Jul 2025

    मंज़िल जानता है!

    ये आँसू ढूँडता है तेरा दामन,मुसाफ़िर अपनी मंज़िल जानता है| असद भोपाली

  • 21st Jul 2025

    मेरे देश की आँखें!

    एक बार फिर से आज मैं, हिंदी साहित्य की हर विधा में अपनी अमिट छप छोडने वाले, कवि स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। अज्ञेय जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की यह कविता–…

←Previous Page
1 … 272 273 274 275 276 … 1,446
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,131 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar