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मेरे देश की आँखें!
एक बार फिर से आज मैं, हिंदी साहित्य की हर विधा में अपनी अमिट छप छोडने वाले, कवि स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। अज्ञेय जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की यह कविता–…
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जीवन!
एक बार फिर से आज मैं, श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। वाजपेयी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता– तुम्हें जीने के लिएकम से कम क्या चाहिए ?थोड़ी सी रोटी, कुछ नमक,…