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दुख !
आज फिर से एक गीत लिखने का प्रयास किया है, आप सुधीजनों के समक्ष प्रस्तुत है- मैं सोचूं दुख जाए तो कुछ पल मैंसुस्ता लूं दुख कहता जाऊंगा, पहले इसको निपटा लूं। रूप बदलकर हर दिन यह तो आ ही जाता है, धमकाता, रिसियाता हैहेकड़ी दिखाता है कैसे शांत करूंइसको कौन सा तमंचा लूं। अपनी…
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आशियाँ जल गया!
आशियाँ जल गया, गुल्सिताँ लुट गया, हम क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगे,इतने मानूस सय्याद से हो गए, अब रिहाई मिलेगी तो मर जाएँगे| राज़ इलाहाबादी
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राह-ए-वफ़ा में !
राह-ए-वफ़ा में फूल नहीं हैं ख़ार बहुत हैं ‘हस्ती’ जी,प्यार का दुश्मन सारा ज़माना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती