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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Jul 2025

    दुख !

    आज फिर से एक गीत लिखने का प्रयास किया है, आप सुधीजनों के समक्ष प्रस्तुत है- मैं सोचूं दुख जाए तो कुछ पल मैंसुस्ता लूं दुख कहता जाऊंगा, पहले इसको निपटा लूं। रूप बदलकर हर दिन यह तो आ ही जाता है, धमकाता, रिसियाता हैहेकड़ी दिखाता है कैसे शांत करूंइसको कौन सा तमंचा लूं। अपनी…

  • 29th Jul 2025

    सब जाम भर जाएँगे!

    और कुछ दिन ये दस्तूर-ए-मय-ख़ाना है, तिश्ना-कामी के ये दिन गुज़र जाएँगे,मेरे साक़ी को नज़रें उठाने तो दो, जितने ख़ाली हैं सब जाम भर जाएँगे| राज़ इलाहाबादी

  • 29th Jul 2025

    आशियाँ जल गया!

    आशियाँ जल गया, गुल्सिताँ लुट गया, हम क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगे,इतने मानूस सय्याद से हो गए, अब रिहाई मिलेगी तो मर जाएँगे| राज़ इलाहाबादी

  • 29th Jul 2025

    समुंदर ने आवाज़ दी!

    इक समुंदर ने आवाज़ दी,मुझ को पानी पिला दीजिए| राज़ इलाहाबादी

  • 29th Jul 2025

    कोई घर जला दीजिए!

    आप अँधेरे में कब तक रहें,फिर कोई घर जला दीजिए| राज़ इलाहाबादी

  • 29th Jul 2025

    क़ीमत-ए-दिल!

    क़ीमत-ए-दिल बता दीजिए,ख़ाक ले कर उड़ा दीजिए| राज़ इलाहाबादी

  • 29th Jul 2025

    तोहमत लगा दीजिए!

    मेरा दामन बहुत साफ़ है,कोई तोहमत लगा दीजिए| राज़ इलाहाबादी

  • 29th Jul 2025

    ज़ुल्फ़ें हटा दीजिए!

    चाँद कब तक गहन में रहे,अब तो ज़ुल्फ़ें हटा दीजिए| राज़ इलाहाबादी

  • 29th Jul 2025

    फिर मुस्कुरा दीजिए!

    लज़्ज़त-ए-ग़म बढ़ा दीजिए,आप फिर मुस्कुरा दीजिए| राज़ इलाहाबादी

  • 29th Jul 2025

    राह-ए-वफ़ा में !

    राह-ए-वफ़ा में फूल नहीं हैं ख़ार बहुत हैं ‘हस्ती’ जी,प्यार का दुश्मन सारा ज़माना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती

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