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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Nov 2025

    नज़राना तेरे हुस्न को!

    नज़राना तेरे हुस्न को क्या दें कि अपने पास,ले दे के एक दिल है सो टूटा हुआ सा है| शहरयार

  • 1st Nov 2025

    क्या हादिसा हुआ है !

    क्या हादिसा हुआ है जहाँ में कि आज फिर,चेहरा हर एक शख़्स का उतरा हुआ सा है| शहरयार

  • 1st Nov 2025

    तुमसे अलग होकर!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि और समाचार पत्रिका दिनमान के संपादन से संबंधित रहे स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता – तुमसे अलग होकर लगता…

  • 31st Oct 2025

    चल चल के थक गया!

    चल चल के थक गया है कि मंज़िल नहीं कोई, क्यूँ वक़्त एक मोड़ पे ठहरा हुआ सा है| शहरयार

  • 31st Oct 2025

    हर फूल अपनी शाख़!

    गुलशन में इस तरह से कब आई थी फ़स्ल-ए-गुल,हर फूल अपनी शाख़ से टूटा हुआ सा है| शहरयार

  • 31st Oct 2025

    भूला हुआ सा है|

    किस फ़िक्र किस ख़याल में खोया हुआ सा है,दिल आज तेरी याद को भूला हुआ सा है| शहरयार

  • 31st Oct 2025

    हमारी बे-हिसी पे!

    हमारी बे-हिसी पे रोने वाला भी नहीं कोई,चलो जल्दी चलो फिर शहर को जलता हुआ देखें| शहरयार

  • 31st Oct 2025

    ये चाहा था कि मंज़र !

    धुएँ के बादलों में छुप गए उजले मकाँ सारे,ये चाहा था कि मंज़र शहर का बदला हुआ देखें| शहरयार

  • 31st Oct 2025

    सुकूत-ए-शाम से!

    सुकूत-ए-शाम* से पहले की मंज़िल सख़्त होती है,कहो लोगों से सूरज को न यूँ ढलता हुआ देखें|*Silence of Evening शहरयार

  • 31st Oct 2025

    पिन बहुत सारे!

    एक बार फिर सेअपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का एक सुंदर गीत आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ, गीत के बोल हैं- ज़िंदगी का अर्थ मरना हो गया है, और जीने के लिए हैं दिन बहुत सारे! आशा है आपको पसंद आएगा,धन्यवाद्।

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