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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Jul 2025

    ये नज़र है कि!

    ये नज़र है कि कोई मौसम है,ये सबा है कि वबाल आया है| दुष्यंत कुमार

  • 31st Jul 2025

    कल तो निकला था!

    कल तो निकला था बहुत सज-धज के,आज लौटा तो निढाल आया है| दुष्यंत कुमार

  • 31st Jul 2025

    एक ढेला तो वहीं!

    एक ढेला तो वहीं अटका था,एक तू और उछाल आया है| दुष्यंत कुमार

  • 31st Jul 2025

    हवा का झोंका!

    एक बच्चा था हवा का झोंका,साफ़ पानी को खँगाल आया है| दुष्यंत कुमार

  • 31st Jul 2025

    इस समुंदर में!

    जाने किस किस का ख़याल आया है,इस समुंदर में उबाल आया है| दुष्यंत कुमार

  • 31st Jul 2025

    इधर उधर देखा!

    हम खड़े थे कि ये ज़मीं होगी,चल पड़ी तो इधर उधर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 31st Jul 2025

    एक एक पर देखा!

    उस परिंदे को चोट आई तो, आप ने एक एक पर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 31st Jul 2025

    गालियों में बड़ा असर!

    नालियों में हयात देखी है,गालियों में बड़ा असर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 31st Jul 2025

    पर्वत से छन कर झरता है पानी!

    एक बार फिर से आज मैं, हिंदी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। इनकी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत– पर्वत से छन कर झरता है पानी,जी भर कर पियोऔर पियो । घाटी-दर-घाटी…

  • 30th Jul 2025

    रास्ता अगर देखा!

    रास्ता काट कर गई बिल्ली, प्यार से रास्ता अगर देखा| दुष्यंत कुमार

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