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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Aug 2025

    अपने बच्चों की तरफ़!

    मौत को हम ने कभी कुछ नहीं समझा मगर आज,अपने बच्चों की तरफ़ देख के डर जाते हैं| शकील जमाली

  • 1st Aug 2025

    लोग कहते हैं कि !

    लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं,इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं| शकील जमाली

  • 1st Aug 2025

    हज को जाना चाहता!

    हमारा हक़ दबा रक्खा है जिस ने,सुना है हज को जाना चाहता है| शकील जमाली

  • 1st Aug 2025

    सूख जाना चाहता है!

    जिसे भी डूबना हो डूब जाए,समुंदर सूख जाना चाहता है| शकील जमाली

  • 1st Aug 2025

    ज़हर खाना चाहता है!

    यहाँ साँसों के लाले पड़ रहे हैं,वो पागल ज़हर खाना चाहता है| शकील जमाली

  • 1st Aug 2025

    पैसे कमाना चाहता है!

    उसे रिश्ते थमा देती है दुनिया,जो दो पैसे कमाना चाहता है| शकील जमाली

  • 1st Aug 2025

    मुस्कुराना चाहता है!

    कोई स्कूल की घंटी बजा दे,ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है| शकील जमाली

  • 1st Aug 2025

    श्रीराम स्तुति

    प्रभु श्रीराम की स्तुति में कुछ पंक्तियां बहुत पहले लिखी थीं, अभी तक जैसी याद रहीं, प्रस्तुत हैं- चिंतन, शील, दया-करुणा जो हर ले भव-बाधा, जीवन का आदर्श राम तेरी यह मर्यादा। दीनबंधु तुम ही भव सागर तारणहारे हो, हो अशरण की शरण निबल के सबल सहारे हो। तुम बिन जीवन की घाटी में केवल…

  • 31st Jul 2025

    आशियाना चाहता है!

    सफ़र से लौट जाना चाहता है,परिंदा आशियाना चाहता है| शकील जमाली

  • 31st Jul 2025

    बेहूदा सवाल आया है!

    हम ने सोचा था जवाब आएगा,एक बेहूदा सवाल आया है| दुष्यंत कुमार

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