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नदी कभी-2
कल एक गीत लिखा था, आज उसमें ही कुछ और छंद जोडे हैं, आप सुधीजनों के समक्ष प्रस्तुत है- नदी कभी नाला बन जाती है, नाला कभी नदी बन जाता है। कुदरत के बलिष्ठ सेनानी हैं वायु, मेघ, पर्वत, सूरज, तारे ये ही मंत्री, यही विधायक हैं दैवी शासन के ये रखवारे, इनका रुख बदला…