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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Jul 2025

    पाँव टूटे हुए नज़र!

    पाँव टूटे हुए नज़र आए,एक ठहरा हुआ सफ़र देखा| दुष्यंत कुमार

  • 30th Jul 2025

    वीरान अपना घर देखा

    आज वीरान अपना घर देखा,तो कई बार झाँक कर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 30th Jul 2025

    जैसे धधक उठें!

    ऐसे सुलग उठा तिरी यादों से दिल मिरा,जैसे धधक उठें कहीं जंगल चिनार के| अजय सहाब

  • 30th Jul 2025

    ख़ामोश हो गए हैं!

    शायद ज़बाँ पे क़र्ज़ था हम ने चुका दिया,ख़ामोश हो गए हैं तुझे हम पुकार के| अजय सहाब

  • 30th Jul 2025

    क्यूँ है मिरी तलाश!

    क्या जाने अब भी दर्द को क्यूँ है मिरी तलाश,टुकड़े भी अब कहाँ बचे इस के शिकार के| अजय सहाब

  • 30th Jul 2025

    कोई तो कारोबार हो!

    दिल में हज़ार दर्द हों आँसू छुपा के रख,कोई तो कारोबार हो बिन इश्तिहार के| अजय सहाब

  • 30th Jul 2025

    जैसे पुराना हार था!

    जैसे पुराना हार था रिश्ता तिरा मिरा,अच्छा किया जो रख दिया तू ने उतार के| अजय सहाब

  • 30th Jul 2025

    रातें थीं क़र्ज़ की!

    हम भी गुज़र गए यहाँ कुछ पल गुज़ार के,रातें थीं क़र्ज़ की यहाँ दिन थे उधार के| अजय सहाब

  • 30th Jul 2025

    काले काले वो गेसू!

    काले काले वो गेसू शिकन-दर-शिकन, वो तबस्सुम का आलम चमन-दर-चमन,खींच ली उन की तस्वीर दिल ने मिरे, अब वो दामन बचा कर किधर जाएँगे| राज़ इलाहाबादी

  • 30th Jul 2025

    गेसू बिखर जाएँगे!

    ऐ नसीम-ए-सहर तुझ को उन की क़सम, उन से जा कर न कहना मिरा हाल-ए-ग़म, अपने मिटने का ग़म तो नहीं है मगर, डर ये है उन के गेसू बिखर जाएँगे| राज़ इलाहाबादी

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