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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Oct 2025

    उस आख़िरी नज़र में !

    उस आख़िरी नज़र में अजब दर्द था ‘मुनीर’,जाने का उस के रंज मुझे उम्र भर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 29th Oct 2025

    दूरी का ये तिलिस्म!

    गुज़री है क्या मज़े से ख़यालों में ज़िंदगी,दूरी का ये तिलिस्म बड़ा कारगर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 29th Oct 2025

    मेरी सदा हवा में!

    मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गई,पर मैं बुला रहा था जिसे बे-ख़बर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 29th Oct 2025

    सुब्ह-ए-सफ़र की!

    सुब्ह-ए-सफ़र की रात थी तारे थे और हवा,साया सा एक देर तलक बाम पर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 29th Oct 2025

    दिल जल रहा था!

    दिल जल रहा था ग़म से मगर नग़्मा-गर रहा,जब तक रहा मैं साथ मिरे ये हुनर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 29th Oct 2025

    मेरे नाम से पहले!

    सुनेगा जब ज़माना मेरी बर्बादी के अफ़्साने,तुम्हारा नाम भी आएगा मेरे नाम से पहले| क़तील शिफ़ाई

  • 29th Oct 2025

    गुज़रा ज़माना बचपन का!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज एक बार फिर मैं मुकेश जी का गाया बहुत प्यारा गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, गीत के बोल हैं- गुज़रा बचपन का, आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद ।

  • 29th Oct 2025

    सितारे शाम से पहले!

    न जाने क्यूँ हमें इस दम तुम्हारी याद आती है,जब आँखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले| क़तील शिफ़ाई

  • 29th Oct 2025

    उँगलियाँ थाम के खुद!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि, नवगीतकार तथा मेरे लिए गुरुतुल्य रहे स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। बेचैन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की यह ग़ज़ल – उँगलियाँ थाम के खुद चलना सिखाया था जिसेराह में…

  • 28th Oct 2025

    कोहराम से पहले!

    कोई कैसे करे दिल में छुपे तूफ़ाँ का अंदाज़ा,सुकूत-ए-मर्ग* छाया है किसी कोहराम से पहले|*सन्नाटा क़तील शिफ़ाई

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