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कोयल के कानों में कह दी!
एक बार फिर से आज मैं, श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अश्वघोष जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।अश्वघोष जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अश्वघोष जी का यह नवगीत– कोयल के कानों में कह दीकुछ बात रस भरीसुधियों में फूल गई आम्र-मंजरी । हरियाले पत्तों की…
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ले गया हमराह अपने!
ले गया हमराह अपने वो मकाँ और बाम-ओ-दर,है नज़र सब कुछ मगर इक बे-मकानी दे गया| नज़र कानपुरी
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फिर से जवानी दे गया!
बज़्म में बे-पर्दा आया मुस्कुरा कर सामने,ना-तवाँ दिल को मिरे फिर से जवानी दे गया| नज़र कानपुरी
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थी ग़ज़ल मेरी बहुत!
थी ग़ज़ल मेरी बहुत बे-रब्त बे-कैफ़-ओ-असर,वो मिरे अशआ’र को अलफ़ाज़-ओ-मा’नी दे गया| नज़र कानपुरी
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बात भी इतनी कि!
बात भी इतनी कि बस उस ने किया मुझ को सलाम,हाँ मगर लोगों के दिल में बद-गुमानी दे गया| नज़र कानपुरी
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वो रवानी दे गया!
सर मिरे सीने पे उस ने जब रखा है ज़िंदगी,इस तरह दरिया-ए-दिल को वो रवानी दे गया| नज़र कानपुरी
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जाते जाते वो मुझे!
जाते जाते वो मुझे अपनी निशानी दे गया,ज़िंदगी-भर के लिए आँखों में पानी दे गया| नज़र कानपुरी
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गीत लिखो !
आज हल्के-फुल्के मूड की अपनी एक नई रचना, छोटी बहर की ग़ज़ल, शेयर कर रहा हूँ- देखो तोता-मैना गीत लिखो, तुमसे बोला है ना, गीत लिखो। कुछ अपनी दुकान जम जाए बस, देंगे चना-चबैना, गीत लिखो। मुक्त हवा करताल बजाएगी,काम करो तुम अपना, गीत लिखो। खुशी, उदासी, बेचैनी, संभ्रमआएंगे-जाएंगे गीत लिखो। भाव, अभाव, प्रभाव बदलते…
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ये पसीना वही आँसू हैं!
ये पसीना वही आँसू हैं जो पी जाते थे हम,‘आरज़ू’ लो वो खुला भेद वो टूटा पानी| आरज़ू लखनवी