Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 6th Aug 2025

    हो सके तो चला आ!

    फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ,जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू| अहमद फ़राज़

  • 6th Aug 2025

    आज के कवि

    आज एक गीत, कविता और कवियों को लेकर- तुम इनसे क्या बात करोगे। तुम पूरे साधारण जन हो, ये हैं काव्य-जगत के नायक, अपने अपने दड़बों के ये विश्व विजेता महिमा गायक, इनकी पहुंच कहाँ तक प्यारे कैसे तहकीकात करोगे। जुड़े हुए इस या उस दल से नारे जैसी कविता लिखते एक तरफ सारे गुण…

  • 5th Aug 2025

    ये हर मक़ाम पे!

    हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है,ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू| अहमद फ़राज़

  • 5th Aug 2025

    दुनिया तुझे बदल देगी!

    मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी,मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू| अहमद फ़राज़

  • 5th Aug 2025

    मिरी मिसाल कि!

    मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ,तिरा ख़याल कि शाख़-ए-चमन का ताइर तू| अहमद फ़राज़

  • 5th Aug 2025

    हुई है शाम तो!

    हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू,कहाँ गया है मिरे शहर के मुसाफ़िर तू| अहमद फ़राज़

  • 5th Aug 2025

    कितना अच्छा था कि!

    कितना अच्छा था कि हम भी जिया करते थे ‘फ़राज़’,ग़ैर-मारूफ़ से गुमनाम से पहले पहले| अहमद फ़राज़

  • 5th Aug 2025

    शाम से पहले पहले!

    सामने उम्र पड़ी है शब-ए-तन्हाई की,वो मुझे छोड़ गया शाम से पहले पहले| अहमद फ़राज़

  • 5th Aug 2025

    अब तिरे ज़िक्र पे !

    अब तिरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं,कितनी रग़बत थी तिरे नाम से पहले पहले| अहमद फ़राज़

  • 5th Aug 2025

    लोग उजड़ जाते हैं!

    ख़ुश हो ऐ दिल कि मोहब्बत तो निभा दी तू ने,लोग उजड़ जाते हैं अंजाम से पहले पहले| अहमद फ़राज़

←Previous Page
1 … 192 193 194 195 196 … 1,381
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar