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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Aug 2025

    मैं इसी गुमाँ में बरसों !

    मैं इसी गुमाँ में बरसों बड़ा मुतमइन रहा हूँ,तिरा जिस्म बे-तग़य्युर मिरा प्यार जावेदाँ है| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    वही ग़म का आसमाँ है!

    मिरे साथ चलने वाले तुझे क्या मिला सफ़र में,वही दुख-भरी ज़मीं है वही ग़म का आसमाँ है| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    ये जनम जनम का रिश्ता!

    कभी पा के तुझ को खोना कभी खो के तुझ को पाना,ये जनम जनम का रिश्ता तिरे मेरे दरमियाँ है| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    वो अगर ख़फ़ा नहीं है!

    वही शख़्स जिस पे अपने दिल-ओ-जाँ निसार कर दूँ,वो अगर ख़फ़ा नहीं है तो ज़रूर बद-गुमाँ है| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    कोई दूसरा कहाँ है!

    ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है,अभी तुझ से मिलता-जुलता कोई दूसरा कहाँ है| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    एक गीत बादलों पर

    आज प्रस्तुत है एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कितना पानी भरकर बैठे ये काले बादलजब भी जी चाहे उसको ढरकाते रहते हैं। जब हम घर में रहेंचैन से फिरते रहते हैंजब बाहर निकलेंतब ये हमको धमकाते हैं। जब देखो ये अपनीअकड़ दिखाते रहते हैं। ऐसा नहीं कि सबको ये समान सरसाते हैंकहीं बाढ़…

  • 12th Aug 2025

    कौन रुख़्सत हुआ!

    कौन रुख़्सत हुआ ख़ुदाई से,हर तरफ़ ये ख़ुदा ख़ुदा क्या है| निदा फ़ाज़ली

  • 12th Aug 2025

    तेरा तजरबा क्या है!

    जो किताबों में है वो सब का है,तू बता तेरा तजरबा क्या है| निदा फ़ाज़ली

  • 12th Aug 2025

    इब्तिदा क्या है !

    चलता जाता है कारवान-ए-हयात,इब्तिदा क्या है इंतिहा क्या है| निदा फ़ाज़ली

  • 12th Aug 2025

    आदमी का अता-पता!

    सब हैं मसरूफ़ कौन बतलाए,आदमी का अता-पता क्या है| निदा फ़ाज़ली

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