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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Aug 2025

    जैसे सहरा में रात!

    ये महकती हुई ग़ज़ल ‘मख़दूम’,जैसे सहरा में रात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन

  • 27th Aug 2025

    रोज़ निकलेगी बात!

    फूल खिलते रहेंगे दुनिया में,रोज़ निकलेगी बात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन

  • 27th Aug 2025

    मेरे दिल में सुरूर!

    मेरे दिल में सुरूर-ए-सुब्ह-ए-बहार,तेरी आँखों में रात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन

  • 27th Aug 2025

    लुट गई काएनात!

    वो शराफ़त तो दिल के साथ गई, लुट गई काएनात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन

  • 27th Aug 2025

    मेरी कविता पुस्तक

    मेरा काव्य संकलन ‘आसमान धुनिए के छप्पर सा’ अब एमेज़ॉन पर उपलब्ध है, इससे संबंधित पोस्टर यहाँ साझा कर रहा हूँ-

  • 27th Aug 2025

    कौन देता है जान!

    कौन देता है जान फूलों पर,कौन करता है बात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन

  • 27th Aug 2025

    मिल रही है हयात!

    नज़रें मिलती हैं जाम मिलते हैं,मिल रही है हयात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन

  • 27th Aug 2025

    कविता की दुनिया!

    आज प्रस्तुत है एक और गीतआप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- क्या कहने निकले थे,हमने क्या कह डाला है,कविता भी तो बंधु भयंकर गड़बड़झाला है। मेरे बस में नहीं कदपि यह खुद ही चलती है, कहीं सरकती, कहीं उछलतीकहीं बिछलती है, यह कविता की चंचलबछिया पीती हाला है। हाथ जोड़ बोला मैंनेकहना है सो कह तू,…

  • 26th Aug 2025

    आप की बात बात !

    आप का साथ साथ फूलों का,आप की बात बात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन

  • 26th Aug 2025

    शाम फूलों की रात!

    फूल के हार फूल के गजरे,शाम फूलों की रात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन

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