Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 28th Aug 2025

    जनाज़ा तिरे दीवाने का!

    हड्डियाँ हैं कई लिपटी हुई ज़ंजीरों में,लिए जाते हैं जनाज़ा तिरे दीवाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 28th Aug 2025

    आँखों में लहू की बूँदें!

    दिल से पहुँची तो हैं आँखों में लहू की बूँदें,सिलसिला शीशे से मिलता तो है पैमाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 28th Aug 2025

    यूँ बहकना नहीं अच्छा!

    अब इसे दार पे ले जा के सुला दे साक़ी,यूँ बहकना नहीं अच्छा तिरे मस्ताने का| फ़ानी बदायुनी

  • 28th Aug 2025

    आओ देखो न तमाशा!

    तुम ने देखा है कभी घर को बदलते हुए रंग,आओ देखो न तमाशा मिरे ग़म-ख़ाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 28th Aug 2025

    ढूँडती है कोई हीला!

    ज़िंदगी भी तो पशेमाँ है यहाँ ला के मुझे,ढूँडती है कोई हीला मिरे मर जाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 28th Aug 2025

    आस्ताना है हरम!

    का’बे को दिल की ज़ियारत के लिए जाता हूँ,आस्ताना है हरम मेरे सनम-ख़ाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 28th Aug 2025

    भेस है परवाने का!

    हुस्न है ज़ात मिरी इश्क़ सिफ़त है मेरी,हूँ तो मैं शम्अ मगर भेस है परवाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 28th Aug 2025

    ख़्वाब है दीवाने का!

    इक मुअ’म्मा है समझने का न समझाने का,ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 28th Aug 2025

    आस पंछी सी!

    अपनी एक नई रचना आज शेयर कर रहा हूँ- आस पंछी सी कहाँ के गीत गाती है, एक पल में सब दिशाएं छान आती है। कौन सा आंगन सखा है कौन शत्रु गली, वर्जनाएं कुछ नहीं ये मानती पगली, सभी सीमाएं तुरंत फलांग आती है। ज़िंदगी में राग-रस पैदा यही करती, सगुन के अक्षत सकारे…

  • 27th Aug 2025

    ख़ल्क़ कहती है जिसे!

    ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का,एक गोशा है ये दुनिया इसी वीराने का| फ़ानी बदायुनी

←Previous Page
1 … 171 172 173 174 175 … 1,380
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar