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आज कल अपना सफ़र!
आज कल अपना सफ़र तय नहीं करता कोई,हाँ सफ़र का सर-ओ-सामान बहुत करता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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चल हवा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा मेरे लिए गुरुतुल्य रहे डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। बेचैन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का यह गीत- चल हवा, उस ओर मेरे साथ चलचल वहाँ तक जिस जगह…
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नुक़सान बहुत करता है!
रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग़,कम से कम रात का नुक़सान बहुत करता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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अंत- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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मन है भारी!
आज प्रस्तुत है एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- मन है भारी आज सुबह सेये दुश्वारी आज सुबह से। कितने जतन किए बचने केघोड़ों की लगाम कसने के, जितना रोके, उतना भागेमन के अश्व नहीं रुकने के, विचलन मन के हो जाते हैंयहाँ कभी भी किसी वजह से। भागे वहाँ, जिधर कुछ पाएनिर्मोही हम…