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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Nov 2025

    बेकसी हद से जब!

    बेकसी हद से जब गुज़र जाए,कोई ऐ दिल जिए की मर जाए| जाँ निसार अख़्तर

  • 10th Nov 2025

    पूर्वजों की अस्थियों में!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। वाजपेयी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – हम अपने पूर्वजों की अस्थियों में रहते हैं- हम उठाते हैं एक शब्दऔर किसी पिछली…

  • 9th Nov 2025

    यही तो एक शिकायत!

    यही तो एक शिकायत सफ़र में रहती है, हवा-ए-गर्द मुसलसल नज़र में रहती है| आबिद जाफ़री

  • 9th Nov 2025

    अचानक सुधर गया हूँ!

    कू-ए-जानाँ में सोग बरपा है,कि अचानक सुधर गया हूँ मैं| जौन एलिया

  • 9th Nov 2025

    ख़ुद से डर गया हूँ मैं!

    तुम से जानाँ मिला हूँ जिस दिन से,बे-तरह ख़ुद से डर गया हूँ मैं| जौन एलिया

  • 9th Nov 2025

    कभी ख़ुद तक पहुँच!

    कभी ख़ुद तक पहुँच नहीं पाया,जब कि वाँ उम्र भर गया हूँ मैं| जौन एलिया

  • 9th Nov 2025

    अजब इल्ज़ाम हूँ!

    अजब इल्ज़ाम हूँ ज़माने का,कि यहाँ सब के सर गया हूँ मैं| जौन एलिया

  • 9th Nov 2025

    वही नाज़-ओ-अदा!

    वही नाज़-ओ-अदा वही ग़म्ज़े,सर-ब-सर आप पर गया हूँ मैं| जौन एलिया

  • 9th Nov 2025

    दिल में एक लहर सी उठी है अभी!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज नासिर काज़मी साहब की यह ग़ज़ल , जिसे ग़ुलाम अली साहब ने गाया है, उसे अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- दिल में एक लहर सी उठी है अभी, कोई ताज़ा हवा चली है अभी। आशा है आपको पसंद आएगी,धन्यवाद।

  • 9th Nov 2025

    अपना सामना !

    अब है बस अपना सामना दर-पेश,हर किसी से गुज़र गया हूँ मैं| जौन एलिया

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