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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Sep 2025

    जिसे इश्क़ कहते हैं!

    खटक गुदगुदी का मज़ा दे रही है,जिसे इश्क़ कहते हैं शायद यही है| ख़ुमार बाराबंकवी

  • 10th Sep 2025

    तिरा ग़म सलामत!

    सुकूँ ही सुकूँ है ख़ुशी ही ख़ुशी है,तिरा ग़म सलामत मुझे क्या कमी है| ख़ुमार बाराबंकवी

  • 10th Sep 2025

    दिया जल रहा है!

    न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है,दिया जल रहा है हवा चल रही है| ख़ुमार बाराबंकवी

  • 10th Sep 2025

    अपने जिस्म से बाहर!

    मैं ख़्वाब देख रहा हूँ कि वो पुकारता है,और अपने जिस्म से बाहर निकल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 10th Sep 2025

    मेरी काव्य पुस्तक संबंधी जानकारी

    कुछ साथियों ने मेरे कविता संकलन के संबंध में जानकारी चाही थी, अतः यह जानकारी यहाँ दे रहा हूँ- आसमान धुनिए के छप्पर सा : Aasmaan Dhuniya ke Chappar Sa Paperback – 24 August 2025Hindi Edition by श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ Shri Krishna Sharma Ashesh (Author) ________________________________________ Other New from ₹199.00 ₹199.00₹199 Here is the link…

  • 10th Sep 2025

    ये हौसला भी तो देख!

    ग़ुबार-ए-राहगुज़र का ये हौसला भी तो देख,हवा-ए-ताज़ा तिरे साथ चल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 10th Sep 2025

    तो आज पैरहन!

    बुला रहा है मिरा जामा-ज़ेब* मिलने को,तो आज पैरहन-ए-जाँ बदल रहा हूँ मैं|*वस्त्रों में सुसज्जित दिखने वाला इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 10th Sep 2025

    जिसके सम्मोहन में पाग़ल!

    आज मैं प्रसिद्ध जनकवि ज़नाब अदम गोंडवी जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। गोंडवी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अदम गोंडवी जी की यह ग़ज़ल – जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है ।एक पहेली-सी ये दुनिया, गल्प भी है, इतिहास…

  • 9th Sep 2025

    कि ढल रहा हूँ मैं!

    तुझी पे ख़त्म है जानाँ मिरे ज़वाल* की रात, तू अब तुलू** भी हो जा कि ढल रहा हूँ मैं| *अस्त होना, *ऊपर उठना इरफ़ान सिद्दीक़ी

  • 9th Sep 2025

    और पिघल रहा हूँ मैं!

    बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं,कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी

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