कि ढल रहा हूँ मैं!

तुझी पे ख़त्म है जानाँ मिरे ज़वाल* की रात,

तू अब तुलू** भी हो जा कि ढल रहा हूँ मैं|

*अस्त होना, *ऊपर उठना

इरफ़ान सिद्दीक़ी

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