-
महँगी शराब पीता हूँ!
मैं उस की आँखों से छलकी शराब पीता हूँ,ग़रीब हो के भी महँगी शराब पीता हूँ। हसरत जयपुरी
-
मिलने को तो मिलते हैं!
अंदाज़-ए-सितम उन का देखे तो कोई ‘हसरत’,मिलने को तो मिलते हैं नश्तर से चुभोते हैं। हसरत जयपुरी
-
सच्चाई की राहों में!
होता चला आया है बे-दर्द ज़माने में,सच्चाई की राहों में काँटे सभी बोते हैं। हसरत जयपुरी
-
मोती से पिरोते हैं!
हम अश्क जुदाई के गिरने ही नहीं देते,बेचैन सी पलकों में मोती से पिरोते हैं। हसरत जयपुरी
-
वो ग़ैर की बाँहों में !
हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं,वो ग़ैर की बाँहों में आराम से सोते हैं। हसरत जयपुरी
-
इसी ज़मीं की अमानत!
इसी ज़मीन में इक दिन मुझे भी सोना है,इसी ज़मीं की अमानत हैं मेरे प्यारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
-
यही तो एक हवाला है!
यही तो एक हवाला है मेरे होने का,यही गिराती है मुझ को यही उतारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
-
सपने हमारे!
प्रस्तुत है आज की रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- सपनों की अलग ही दुनिया हैनिराली, नशीलीभयावह भी होती है कभी! एक अलग दुनिया है वोलेकिन उसका आधार हमारी ज़िंदगी में ही है, हमारी कामनाएं, हमारे भयवे ही सृजन करते हैंहमारे सपनों का। जैसे सायास हम रचते हैं कविता, वैसे ही कामनाओं और आशंकाओं मेंउलझा…
-
सफ़र में साथ रहे!
प जैसे रेल में दो अजनबी मुसाफ़िर हों,सफ़र में साथ रहे यूँ तो हम तुम्हारे भी| अमजद इस्लाम अमजद