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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Nov 2025

    दिल से बातें होती हैं!

    जब वो नहीं होते पहलू में और लम्बी रातें होती हैं, याद आ के सताती रहती है और दिल से बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 14th Nov 2025

    आँखों में अंधेरा!

    आशोब-ए-जुदाई क्या कहिए अन-होनी बातें होती हैं,आँखों में अंधेरा छाता है जब उजाली रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 14th Nov 2025

    जोश ए जवानी हाय रे हाय!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज एक बार फिर, अपने स्वर में मुकेश जी का गाया एक प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- जोश ए जवानी हाय रे हाय निकले जिधर से धूम मचाए। आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद।

  • 14th Nov 2025

    क़हर की रातें होती हैं!

    जिन रातों में नींद उड़ जाती है क्या क़हर की रातें होती हैं,दरवाज़ों से टकरा जाते हैं दीवारों से बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 14th Nov 2025

    कैसे-कैसे रूप सलोने

    प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कैसे-कैसे रूप सलोनेधर संताप मिले,लिए रूप आशीषों काहमको अभिशाप मिले। यह दुनिया है, यहाँ सभी केढंग निराले हैं,भोले लगते प्राणीआफत के परकाले हैं। सोच-समझकर मिलना भाईसब लोगों से तुम जाने कैसा छल कबओढे हुए लिहाफ मिलें। नाट्य मंडली यह दुनियाप्यासी है नोटों कीमंचों के…

  • 13th Nov 2025

    जो तेरे शहर में!

    उन्हीं पे सारे मसाइब का बोझ रक्खा है, जो तेरे शहर में ईमान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    जो पारसा हो तो!

    जो पारसा हो तो क्यूँ इम्तिहाँ से डरते हो,हम ए’तिबार का मीज़ान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    हम उस निगाह का!

    ये ज़ख़्म-ए-दिल नहीं एहसान की निशानी है,हम उस निगाह का एहसान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    झुलसते ख़्वाबों की!

    हमारे पास फ़क़त धूप है ख़यालों की,झुलसते ख़्वाबों की दुक्कान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    इन आँसुओं का कोई!

    इन आँसुओं का कोई क़द्र-दान मिल जाए,कि हम भी ‘मीर’ का दीवान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

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