Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 15th Nov 2025

    जो कुछ भी ख़ुशी से!

    जो कुछ भी ख़ुशी से होता है ये दिल का बोझ न बन जाए,पैमान-ए-वफ़ा भी रहने दो सब झूटी बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 15th Nov 2025

    हँसने में जो आँसू !

    हँसने में जो आँसू आते हैं नैरंग-ए-जहाँ बतलाते हैं,हर रोज़ जनाज़े जाते हैं हर रोज़ बरातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 15th Nov 2025

    पहरों बातें होती हैं!

    जो कान लगा कर सुनते हैं क्या जानें रुमूज़ मोहब्बत के,अब होंट नहीं हिलने पाते और पहरों बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 15th Nov 2025

    ये बीसवीं सदी है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह श्रेष्ठ नवगीत शेयर कर रहा हूँ- आंखों में सिर्फ बादल, सुनसान बिजलियां हैंअंगार हैं अधर पर, सब सांस आंधियां हैंरग-रग में तैरती सी इक आग की नदी है,ये बीसवीं सदी है! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 15th Nov 2025

    हम भी दुखी, तुम भी दुखी !

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।प्रभाकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत- रातरानी रात मेंदिन में खिले सूरजमुखीकिन्‍तु फिर भी आज कलहम भी दुखीतुम भी दुखी !…

  • 14th Nov 2025

    ऐसी रातें होती हैं!

    क़िस्मत जागे तो हम सोएँ क़िस्मत सोए तो हम जागें, दोनों ही को नींद आए जिस में कब ऐसी रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 14th Nov 2025

    इस बदली हुई रुत में!

    आँखों में कहाँ रस की बूँदें कुछ है तो लहू की लाली है,इस बदली हुई रुत में अब तो ख़ूनीं बरसातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 14th Nov 2025

    तय करना हैं झगड़े!

    तय करना हैं झगड़े जीने के जिस तरह बने कहते सुनते,बहरों से भी पाला पड़ता है गूँगों से भी बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 14th Nov 2025

    दुनिया-ए-फ़िराक़ में!

    उम्मीद का सूरज डूबा है आँखों में अंधेरा छाया है,दुनिया-ए-फ़िराक़ में दिन कैसा रातें ही रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

  • 14th Nov 2025

    घिर घिर के बादल!

    घिर घिर के बादल आते हैं और बे-बरसे खुल जाते हैं,उम्मीदों की झूटी दुनिया में सूखी बरसातें होती हैं| आरज़ू लखनवी

←Previous Page
1 … 157 158 159 160 161 … 1,432
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,132 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar