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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Mar 2026

    लोग आए हैं सुन के!

    सूली चढ़ने लगी है ख़ामोशी,लोग आए हैं सुन के मीलों से| गुलज़ार

  • 9th Mar 2026

    ढाई मन से कम नहीं!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं काका हाथरसी जी की एक हास्य कविता शेयर कर रहा हूँ जो मोटी पत्नी को लेकर है- ढाई मन से कम नहीं, तौल सके तो तौल! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******

  • 9th Mar 2026

    आसमाँ भर गया है!

    गर्म लाशें गिरीं फ़सीलों से,आसमाँ भर गया है चीलों से| गुलज़ार

  • 9th Mar 2026

    यूँ तो हज़ार दर्द से!

    यूँ तो हज़ार दर्द से रोते हैं बद-नसीब,तुम दिल दुखाओ वक़्त-ए-मुसीबत तो बात है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 9th Mar 2026

    किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में अनाड़ी फ़िल्म के लिए मुकेश जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे शैलेंद्र जी ने लिखा था और शंकर-जयकिशन ने इसका संगीत दिया था- किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 9th Mar 2026

    जिस का सितम भी !

    उस जान-ए-दोस्ती का ख़ुलूस-ए-निहाँ न पूछ,जिस का सितम भी ग़ैरत-ए-सद-इल्तिफ़ात है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 9th Mar 2026

    बाँह फैलाए खड़े, निरुपाय!

    आज मैं फिर से अपने अत्यंत प्रिय हिंदी गीत कवि स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय किशन सरोज जी का यह नवगीत– बाँह फैलाए खड़े, निरुपाय, तट के वृक्ष हमओ नदी ! दो चार पल, ठहरो हमारे…

  • 8th Mar 2026

    फिर किस लिए ये फ़िक्र!

    हस्ती ब-जुज़ फ़ना-ए-मुसलसल के कुछ नहीं,फिर किस लिए ये फ़िक्र-ए-क़रार-ओ-सबात है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 8th Mar 2026

    तोड़ा है ला-मकाँ की!

    तोड़ा है ला-मकाँ की हदों को भी इश्क़ ने,ज़िंदान-ए-अक़्ल तेरी तो क्या काएनात है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 8th Mar 2026

    पंचभूत- हास्य कविता

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं काका हाथरसी जी की एक छोटी सी हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- शा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******

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