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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Nov 2025

    हो अगर मौज में !

    हो अगर मौज में हम जैसा कोई अंधा फ़क़ीर,एक सिक्के से भी तक़दीर सँवर सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    मेरी ख़्वाहिश है कि!

    मेरी ख़्वाहिश है कि फूलों से तुझे फ़त्ह करूँ, वर्ना ये काम तो तलवार भी कर सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    ये मोहब्बत तो!

    तुझ से कुछ और त’अल्लुक़ भी ज़रूरी है मिरा,ये मोहब्बत तो किसी वक़्त भी मर सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    मेरा यूट्यूब चैनल

    मैं अपने यूट्यूब चैनल पर नियमित रूप से कविताएं- जिनमें मेरी अपनी कविताओं के अलावा अत्यंत श्रेष्ठ कवियों- सोम ठाकुर जी, भारत भूषण जी, किशन सरोज जी आदि के गीत मुकेश जी, जगजीत सिंह जी, गुलाम अली जी, अनूप जलोटा जी आदि द्वारा गाई गई गीत और गज़लें आदि प्रस्तुत करता हूँ। मैं इन सबको…

  • 17th Nov 2025

    कोई भी शक्ल मिरे!

    कोई भी शक्ल मिरे दिल में उतर सकती है,इक रिफ़ाक़त में कहाँ उम्र गुज़र सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    जब तक माथा चूम के!

    जब तक माथा चूम के रुख़्सत करने वाली ज़िंदा थी,दरवाज़े के बाहर तक भी मुँह में लुक़्मा होता था| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    एक थैला, दो शिकन, हम तीन!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक श्रेष्ठ नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- एक थैला, दो शिकन, हम तीनडूबते सूरज तुझे आमीन! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद।

  • 17th Nov 2025

    सपना पूरा होता था!

    शुक्र करो तुम इस बस्ती में भी स्कूल खुला वर्ना,मर जाने के बा’द किसी का सपना पूरा होता था| अज़हर फ़राग़

  • 17th Nov 2025

    कठोर हुई ज़िंदगी!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री सोम ठाकुर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।सोम जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत- हमने तो जन्म से पहाड़ जिएऔर भी कठोर हुई ज़िंदगीदृष्टि खंड -खंड टूटने लगीकुहरे की भोर…

  • 16th Nov 2025

    कमरा गीला होता था!

    कभी कभी आती थी पहले वस्ल की लज़्ज़त अंदर तक, बारिश तिरछी पड़ती थी तो कमरा गीला होता था| अज़हर फ़राग़

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