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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Nov 2025

    आज सुबह का गीत!

    प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- वर्तमान बन रहा अतीत,ये है आज सुबह का गीत। पूंजी हमें मिली सपनों कीहर रस्ते पर साथ चले हैंहम जब गिरकर उठे राह मेंसदा हाथ में हाथ गहे हैं, झंडे और कनात नहीं हैंअपनी पूंजी, अपने गीत। एकाकी जीवन में हमनेडोर नहीं छोड़ी सपनों…

  • 18th Nov 2025

    मैं कैसे सो जाऊँ!

    किसी सूरत भी नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ,कोई शय दिल को बहलाती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी

  • 18th Nov 2025

    मिरे साथ जल न जाए!

    मुझे फूँकने से पहले मिरा दिल निकाल लेना,ये किसी की है अमानत मिरे साथ जल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी

  • 18th Nov 2025

    दम निकल न जाए!

    मिरी ज़िंदगी के मालिक मिरे दिल पे हाथ रखना,तिरे आने की ख़ुशी में मिरा दम निकल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी

  • 18th Nov 2025

    फिर सँभल न जाए!

    अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी,तिरा रिंद गिरते गिरते कहीं फिर सँभल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी

  • 18th Nov 2025

    मिरे अश्क भी हैं इसमें

    मिरे अश्क भी हैं इस में ये शराब उबल न जाए,मिरा जाम छूने वाले तिरा हाथ जल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी

  • 18th Nov 2025

    न झुकाओ तुम निगाहें!

    मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए,न झुकाओ तुम निगाहें कहीं रात ढल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी

  • 18th Nov 2025

    हम तेरे शहर में !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में ग़ुलाम अली जी की गाई ये प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह सिर्फ एक बार मुलाक़ात का मौका दे दे। आशा है आपको ये पसंद आएगा,धन्यवाद।

  • 18th Nov 2025

    चाँद की लाश कहीं!

    सुब्ह-दम सुर्ख़ उजाला है खुले पानी में,चाँद की लाश कहीं से भी उभर सकती है| अज़हर फ़राग़

  • 18th Nov 2025

    आर्थिक संबंधों का गीत!

    अपना एक पुराना नवगीत अचानक याद आया, मैंने शायद इसे शेयर नहीं किया है- हैं कहीं महाजन हमकहीं हैं फक़ीरमिटते संबंध ज्योंधुएं की लकीर। अड़ियल मेहमानबना बैठा संत्रासजेबों से निकल गएकितने विश्वास, शो-केसों मेंज़िंदगी जा सजीपढते हम रह गएहाथ की लकीर। खुशियों के आयोजनभार हो गएजड़ता के बंधनस्वीकार हो गए,बुझे हुए सपनेज्यों होली की राखउड़ती…

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