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इस शाम के बा’द!
ज़ुल्फ़ें रुख़-ए-पुर-नूर पे कहती हैं बिखर के,इस शाम के बा’द और कोई शाम नहीं है। रौशन बनारसी
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मेरे यू ट्यूब चैनल पर
मैंने अपने यू ट्यूब चैनल पर अपनी आवाज़ में मेरे प्रिय गायक मुकेश जी का एक और गीत अपलोड किया है, आज वही शेयर कर रहा हूँ- ओह रे ताल मिले नदी के जल में https://youtu.be/m_eU_UTwQ4c?si=480jSyRlIs4C20Du आशा है आपको पसन्द आएगा।
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हो दिल में मोहब्बत!
हो दिल में मोहब्बत तो हो एहसास-ए-मोहब्बतफ़ितरत का ये इनआ’म मगर आम नहीं है। रौशन बनारसी
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किस मुँह से कहूँ !
ये दर्द ये सोज़िश ये तड़प और ये आहें,किस मुँह से कहूँ इश्क़ में आराम नहीं है। रौशन बनारसी
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ख़बर-ए-शाम नहीं है!
है शाम तो अब सुब्ह का होना है क़यामत,जब सुब्ह हुई तो ख़बर-ए-शाम नहीं है। रौशन बनारसी
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आराम सुकूँ में है!
आराम सुकूँ में है सुकूँ मौत में या’नी,जीने में तो ज़ाहिर है कि आराम नहीं है। रौशन बनारसी
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दिल्ली!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री उदय प्रकाश जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। उदय जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदय प्रकाश जी की यह कविता – समुद्र के किनारेअकेले नारियल के पेड़ की तरह हैएक अकेला आदमी इस शहर में. समुद्र के…
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बे आप के देखे भी!
नज़्ज़ारे से हाँ और भी दिल होता है बेचैन,बे आप के देखे भी तो आराम नहीं है। रौशन बनारसी
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आग़ाज़ ही आग़ाज़ है!
मंज़िल का मोहब्बत मैं कहीं नाम नहीं है,आग़ाज़ ही आग़ाज़ है अंजाम नहीं है। रौशन बनारसी