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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Dec 2025

    थे ख़्वाब एक हमारे!

    थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी,पर अपना खेल दिखाते रहे सितारे भी| अमजद इस्लाम अमजद

  • 4th Dec 2025

    राज़ नहीं रह सकता!

    साफ़ ज़ाहिर है कि अब राज़ नहीं रह सकता,राज़-दारों ने छुपाने की क़सम खाई है| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 4th Dec 2025

    तुझ पे मरता हूँ तिरे!

    तुझ पे मरता हूँ तिरे सर की क़सम खाता हूँ,ग़ैर ने आज ठिकाने की क़सम खाई है| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 4th Dec 2025

    डर यही है कि कहीं!

    डर यही है कि कहीं ख़ुद से न धोका खा जाए,जिस ने धोके में न आने की क़सम खाई है| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 4th Dec 2025

    इन्क़िलाबात के शोले!

    इन्क़िलाबात के शोले भी कहीं बुझते हैं,आप ने आग बुझाने की क़सम खाई है| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 4th Dec 2025

    चंदन वन डूब गया!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक श्रेष्ठ गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- वह देखो कुहरे में, चंदन वन डूब गया। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 4th Dec 2025

    हम हैं काव्यलोक के वासी!

    प्रस्तुत है आज का गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- हम हैं काव्यलोक के वासीगीतों में रोते-हंसते हैं।जब-जब मन व्याकुल होता हैहम उसकी लगाम कसते हैं। जो पाषाण हृदय प्राणी हैंउनकी अपनी आन-बान है,सदा चाहते वंदित होनाउनसे ही चलता जहान है,यह आधुनिक जगत है भाईपग-पग पर विषधर डसते हैं। पत्थर बनकर पूजित होंगेमोम बने तो…

  • 3rd Dec 2025

    आशियानों को जलाने!

    बाग़बानों ने ये एहसास हुआ है मुझ को,आशियानों को जलाने की क़सम खाई है| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 3rd Dec 2025

    तुम ने जी भर के!

    तुम ने जी भर के सताने की क़सम खाई है, मैं ने आँसू न बहाने की क़सम खाई है| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

  • 3rd Dec 2025

    मैं भी हूँ इसी दश्त का!

    मैं राह-नुमाओं में नहीं मान मिरी बात,मैं भी हूँ इसी दश्त का सौदाई इधर आ| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

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