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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Mar 2026

    सरोवर है शवासन में !

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। ओम प्रभाकर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत – सरोवर हैशवासन में ! हवा व्‍याकुलगंध कन्‍धों पर धरेवृक्ष तट केबौखलाहट से भरे ।मूढ़ता-सी…

  • 28th Mar 2026

    उस ने इस दर्जा रुलाया!

    ख़ुद-ब-ख़ुद बे-साख़्ता मैं हँस पड़ा,उस ने इस दर्जा रुलाया देर तक| नवाज़ देवबंदी

  • 28th Mar 2026

    और भी वो याद आया!

    भूलना चाहा कभी उस को अगर,और भी वो याद आया देर तक| नवाज़ देवबंदी

  • 28th Mar 2026

    मुस्कुराया देर तक!

    वो रुला कर हँस न पाया देर तक,जब मैं रो कर मुस्कुराया देर तक| नवाज़ देवबंदी

  • 28th Mar 2026

    कारवां गुज़र गया-3

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं , अपने स्वर में नीरज जी के इस प्रसिद्ध गीत का दूसरा भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मोहम्मद रफी जी ने गाया था- कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे-3 आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *********

  • 28th Mar 2026

    क्या क्या नहीं कहते!

    बन जाए अगर बात तो सब कहते हैं क्या क्या,और बात बिगड़ जाए तो क्या क्या नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी

  • 28th Mar 2026

    नदी बोली समुंदर से!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का एक सुंदर गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- नदी बोली समुंदर से, मैं तेरे पास आई हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******

  • 28th Mar 2026

    कम-हिम्मती ख़तरा है!

    कम-हिम्मती ख़तरा है समुंदर के सफ़र में,तूफ़ान को हम दोस्तो ख़तरा नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी

  • 28th Mar 2026

    सृजन क्षण!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री उद्भ्रांत जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। उद्भ्रांत जी की रचनाएं शायद मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उद्भ्रांत जी का यह नवगीत – सूर्य ने पुकाराकल मेरी आकृति को सूर्य ने पुकारा उजली उजली किरणेंचेहरे से फूटींस्वर के बन्दीगृह कीदीवारें टूटीं…

  • 27th Mar 2026

    इक हम हैं कि ग़ैरों को भी!

    इक हम हैं कि ग़ैरों को भी कह देते हैं अपना, इक तुम हो कि अपनों को भी अपना नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी

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