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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Mar 2026

    आते हैं चले जाते हैं!

    मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते हैं,हँस तालाब पे आते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 30th Mar 2026

    नज़र को अपनी!

    अना-पसंद हैं ‘हस्ती’-जी सच सही लेकिन,नज़र को अपनी हमेशा झुका के रखते हैं| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Mar 2026

    बड़े क़रीने से घर को!

    कहीं ख़ुलूस कहीं दोस्ती कहीं पे वफ़ा,बड़े क़रीने से घर को सजा के रखते हैं| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Mar 2026

    जिसे निशाने पे रक्खें!

    हमें पसंद नहीं जंग में भी मक्कारी,जिसे निशाने पे रक्खें बता के रखते हैं| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Mar 2026

    कारवां गुज़र गया-5

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में नीरज जी के इस प्रसिद्ध गीत का अगला भाग, यह गीत फिल्म- नई उमर की नई फसल के लिए मोहम्मद रफी साहब ने गाया था-कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे-5 आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ********

  • 30th Mar 2026

    मिला दिया है पसीना!

    मिला दिया है पसीना भले ही मिट्टी में,हम अपनी आँख का पानी बचा के रखते हैं| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Mar 2026

    तेवर बला के रखते हैं!

    चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं,हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Mar 2026

    एक अकेला इस शहर में!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं , अपने स्वर में घरौंदा फिल्म का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे गुल्ज़ार जी ने लिखा था और भूपेंद्र सिंह जी ने गाया था- एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में,आब-ओ-दाना ढूंढता है! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 30th Mar 2026

    यार ये क़िस्सा क्या है!

    वो जो क़िस्से में था शामिल वही कहता है मुझे,मुझ को मालूम नहीं यार ये क़िस्सा क्या है| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Mar 2026

    आँगन गायब हो गया!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कैलाश गौतम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। कैलाश जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का यह नवगीत – घर फूटे गलियारे निकले आँगन गायब हो गयाशासन और प्रशासन में अनुशासन ग़ायब हो गया…

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