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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Apr 2026

    कमरे में धूप!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। कुंवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की यह कविता – हवा और दरवाज़ों में बहस होती रही,दीवारें सुनती रहीं।धूप चुपचाप एक कुरसी पर बैठीकिरणों के…

  • 31st Mar 2026

    शहर का शहर मुझे!

    ये अजब साअत-ए-रुख़्सत है कि डर लगता है,शहर का शहर मुझे रख़्त-ए-सफ़र लगता है| अब्बास ताबिश

  • 31st Mar 2026

    आप तो आग लगाते हैं!

    आप को कौन तमाशाई समझता है यहाँ,आप तो आग लगाते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 31st Mar 2026

    कब तुम्हें इश्क़ पे !

    कब तुम्हें इश्क़ पे मजबूर किया है हम ने,हम तो बस याद दिलाते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 31st Mar 2026

    आप आते हैं रुलाते हैं

    शादी-ए-मर्ग का माहौल बना रहता है,आप आते हैं रुलाते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 31st Mar 2026

    कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे-6

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं नीरज जी के इस लोकप्रिय गीत का अगला भाग अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, फिल्म-नई उमर की नई फसल के लिए यह गीत मोहम्मद रफी जी ने गाया था- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 31st Mar 2026

    मेरी आँखों से बहा !

    मेरी आँखों से बहा करती है उन की ख़ुश्बू,रफ़्तगाँ ख़्वाब में आते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 31st Mar 2026

    दिल पे मुश्किल है बहुत!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- दिल पे मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******

  • 31st Mar 2026

    जाते हैं चले जाते हैं!

    इस लिए अब मैं किसी को नहीं जाने देता,जो मुझे छोड़ के जाते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 31st Mar 2026

    एक सुनहली किरण उसे भी दे दो!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीय कीर्ति चौधरी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। कीर्ति जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कीर्ति चौधरी जी की यह कविता – एक सुनहली किरण उसे भी दे दोभटक गया जो अंधियारे के वन में,लेकिन जिसके मन में,अभी…

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