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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Oct 2019

    समय पर कविता- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 14th Oct 2019

    मेरे सपनों से मगर!

    अभी कहीं यह उल्लेख हुआ था कि ‘राइटर्स ब्लॉक’ को तोड़ने के लिए, मतलब कि अगर आप कुछ नया नहीं लिख पा रहे हों, तो आपको अपने कोई स्वप्न याद करने चाहिएं और उनको लिख डालना चाहिए, अब यह फैसला आप बाद में कर सकते हैं कि उसको शेयर करना है या नहीं, हाँ इससे…

  • 13th Oct 2019

    थोड़ी दूर साथ चलो!

    आज ज़नाब अहमद फराज़ साहब की लिखी एक गज़ल याद आ रही है, जिसे गुलाम अली साहब ने बहुत सुंदर ढंग से गाया है। इस छोटी सी गज़ल में बहुत गहरी बात,अहमद फराज़ साहब ने बहुत सरल अंदाज़ में कह दी हैं, आइए इस गज़ल का आनंद लेते हैं-   कठिन है राह-गुज़र थोड़ी देर…

  • 12th Oct 2019

    ताऊ जी!

      आज ताऊ जी के बारे में कुछ बात कर लेते हैं।     ताऊ जी, हमारे बहुत पहले छूटे हुए गांव के एक ऐसे कैरेक्टर हैं, जिनको शुरू से ही घूमना, विशेष रूप से शहर की रौनक देखना पसंद रहा है। ताऊ जी जब घर में आते हैं तो थोड़ा बहुत गांव भी घर…

  • 11th Oct 2019

    सूर्यास्त समुद्र किनारे का!

    समुद्र किनारे से सूर्यास्त देखकर एक शेर याद आ रहा है, शायद मीना कुमारी का लिखा हुआ है-     ढूंढ़ते रह जाएंगे, साहिल पे कदमों के निशां, रात के गहरे समंदर में उतर जाएगी शाम।   आज के लिए इतना ही। नमस्कार।   ********

  • 10th Oct 2019

    75.जो हुआ ही नहीं अखबार में आ जाएगा

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट-     ज़नाब राहत इंदौरी का एक शेर याद आ रहा है जो उन्होंने किसी प्रोग्राम में पढ़ा था- बनके इक हादसा, किरदार में आ जाएगा जो हुआ ही नहीं, अखबार में आ जाएगा। अब खबरों की…

  • 9th Oct 2019

    पाला हुआ पक्षी पिंजरे में था- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 8th Oct 2019

    यह बात किसी से मत कहना!

    आज फिर हिंदी कवि सम्मेलनों में काफी लोकप्रिय कवि रहे- स्व. देवराज दिनेश जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। स्व. देवराज दिनेश जी वैसे व्यंग्य कविताओं के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन उन्होंने बहुत से गीत भी लिखे थे और यह उनके प्रिय गीतों में से एक है। यह एक प्रेमगीत है या कहें…

  • 7th Oct 2019

    बोल मेरी मछली कितना पानी!

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट-     बरसात का मौसम अपने हिस्से की तबाही मचाकर जाने वाला है, अब गरीबों को सर्दी का सामना करना होगा। क्योंकि हर मौसम की मार, गरीबों को ही तो वास्तव में सहनी पड़ती है। अमीर अथवा मध्यम वर्ग तो…

  • 6th Oct 2019

    मिला नहीं कोई भी ऐसा, जिससे अपनी पीर कहूं मैं!

    आज फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय गीत कवि स्व. भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। कविता, गीत आदि स्वयं अपनी बात कहते हैं और जितना ज्यादा प्रभावी रूप से कहते हैं, वही उसकी सफलता की पहचान है। लीजिए आज के लिए स्व. भारत भूषण जी का यह गीत आपको…

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