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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Feb 2022

    आँसू मेरे दामन पे बिखर जाने दे!

    आग दुनिया की लगाई हुई बुझ जाएगी,कोई आँसू मेरे दामन पे बिखर जाने दे। नज़ीर बाक़री

  • 14th Feb 2022

    कोई ज़ख़्म तो भर जाने दे!

    ऐ नये दोस्त मैं समझूँगा तुझे भी अपना,पहले माज़ी का कोई ज़ख़्म तो भर जाने दे| नज़ीर बाक़री

  • 14th Feb 2022

    मुझे डूब के मर जाने दे!

    अपनी आँखों के समंदर मैं उतर जाने दे,तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे| नज़ीर बाक़री

  • 14th Feb 2022

    नाव जर्जर ही सही!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक प्रमुख कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमायर जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ | दुष्यंत जी हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि थे, लेकिन वे जनकवि तब बने जब आपातकाल के दौरान उनकी एक के बाद एक ग़ज़लें सामने आईं, प्रारंभ में कमलेश्वर जी ने कथा पत्रिका सारिका…

  • 13th Feb 2022

    अपना ही इन्तज़ार किया!

    तेरी राहों में हर बार रुक कर,हमने अपना ही इन्तज़ार किया| गुलज़ार

  • 13th Feb 2022

    आदतन हमने ऐतबार किया!

    आदतन तुमने कर दिये वादे,आदतन हमने ऐतबार किया| गुलज़ार

  • 13th Feb 2022

    अपनी बात सुनाई भी!

    ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी है,उनकी बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी| गुलज़ार

  • 13th Feb 2022

    आपका इक सौदाई भी!

    दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में,मेरे साथ चला आया है आपका इक सौदाई भी| गुलज़ार

  • 13th Feb 2022

    माज़ी की रुसवाई भी!

    यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं,कितनी सौंधी लगती है तब माज़ी की रुसवाई भी| गुलज़ार

  • 13th Feb 2022

    वो भी हों तनहाई भी!

    एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी,ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी| गुलज़ार

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