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तुम यूँ ही ख़फ़ा रहना !
आज मैं फिर से हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी का एक बहुत प्यारा सा गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| कल के गीत की तरह, यह गीत भी राज कपूर साहब द्वारा अभिनीत फिल्म- ‘दिल ही तो है’ के लिए साहिर लुधियानवी साहब ने लिखा था और इसका संगीत रोशन साहब ने तैयार किया था|…
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नशे में चूर हूँ मैं भी-
नशे में चूर हूँ मैं भी तुम्हें भी होश नहीं, बड़ा मज़ा हो अगर थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़
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कठिन है राहगुज़र!
कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो, बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़
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तो मुश्किल होगी!
एक बार फिर से आज मैं हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी का एक बहुत प्यारा सा गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| राज कपूर साहब द्वारा अभिनीत फिल्म- ‘दिल ही तो है’ के लिए यह गीत साहिर लुधियानवी साहब ने लिखा था और इसका संगीत रोशन साहब ने तैयार किया था| लीजिए प्रस्तुत हैं…
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सूरज कभी निकलेगा ‘नज़ीर!
इन अंधेरों से ही सूरज कभी निकलेगा ‘नज़ीर’,रात के साये जरा और निखर जाने दे। नज़ीर बाक़री
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मोती भी बिखर जाने दे!
ज़िंदगी मैंने इसे कैसे पिरोया था न सोच,हार टूटा है तो मोती भी बिखर जाने दे। नज़ीर बाक़री
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मगर जाने दे!
ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको,सोचता हूँ कि कहू तुझसे, मगर जाने दे। नज़ीर बाक़री