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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Feb 2022

    आँखों ने कुछ और कह दिया!

    लेकिन हमारी आँखों ने कुछ और कह दिया,कुछ और कहते रह गए अपनी ज़बाँ से हम| राजेश रेड्डी

  • 9th Feb 2022

    काम यक़ीं का गुमाँ से हम!

    अब तो सराब ही से बुझाने लगे हैं प्यास,लेने लगें हैं काम यक़ीं का गुमाँ से हम| राजेश रेड्डी

  • 9th Feb 2022

    नाराज़ हैं ज़मीं से!

    क्या जाने किस जहाँ में मिलेगा हमें सुकून,नाराज़ हैं ज़मीं से ख़फ़ा आसमाँ से हम| राजेश रेड्डी

  • 9th Feb 2022

    टूटे हैं कितने कहाँ से हम!

    अब क्या बताएँ टूटे हैं कितने कहाँ से हम,ख़ुद को समेटते हैं यहाँ से वहाँ से हम| राजेश रेड्डी

  • 9th Feb 2022

    क्या-क्या करतब आते हैं!

    काग़ज़ की कश्ती में दरिया पार किया,देखो हम को क्या-क्या करतब आते हैं| शहरयार

  • 9th Feb 2022

    पर्दा है पर्दा!

    हिजाब को लेकर एक नया मुद्दा मिला है आन्दोलनजीवी, जो जब से मोदी सरकार आई है, असंतोष पैदा करने का लिए मुद्दे ढूंढते ही रहते हैं| मैं एक बार फिर से कह दूँ कि यद्यपि प्रधानमंत्री जी ने देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीनों कृषि कानून वापस ले लिए हैं, क्योंकि किसान…

  • 9th Feb 2022

    देखो दुनिया को!

    जागती आँखों से भी देखो दुनिया को,ख़्वाबों का क्या है वो हर शब आते हैं| शहरयार

  • 9th Feb 2022

    तुमसे नाराज़ तो नहीं हूँ मैं!

    आज मैं फिर से अपने अत्यंत प्रिय कवि एवं नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो मुझे अत्यंत प्रिय रहा है| शायद इस गीत का कुछ भाग मैंने पहले भी शेयर किया हो| यह गीत व्यक्ति के आशावाद और जीवट शक्ति को प्रबल अभिव्यक्ति देता है| परेशानियों से हार…

  • 8th Feb 2022

    दामन तर करने अब आते हैं!

    जज़्ब करे क्यों रेत हमारे अश्कों को,तेरा दामन तर करने अब आते हैं| शहरयार

  • 8th Feb 2022

    याद हमें सब आते हैं!

    ऐसे हिज्र के मौसम अब कब आते हैं,तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं| शहरयार

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