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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Mar 2022

    रवींद्रनाथ ठाकुर- वसंत का एक दिन

    आज फिर से मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट प्रस्तुत कर रहा हूँ| आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत…

  • 7th Mar 2022

    छान के फटक के मुझे!

    मैं देर रात गए जब भी घर पहुँचता हूँ,वो देखती है बहुत छान के फटक के मुझे| राहत इन्दौरी

  • 7th Mar 2022

    इशारा कर दिया उसने!

    बहुत सी नज़रें हमारी तरफ हैं महफ़िल में,इशारा कर दिया उसने ज़रा सरक के मुझे| राहत इन्दौरी

  • 7th Mar 2022

    ये एक जुगनू ने समझा दिया!

    हमें खुद अपने सितारे तलाशने होंगे,ये एक जुगनू ने समझा दिया चमक के मुझे| राहत इन्दौरी

  • 7th Mar 2022

    कमज़र्फ ने छलक के मुझे!

    तआल्लुकात में कैसे दरार पड़ती है,दिखा दिया किसी कमज़र्फ ने छलक के मुझे| राहत इन्दौरी

  • 7th Mar 2022

    परेशां करता है ये दिल!

    कोई बताये के मैं इसका क्या इलाज करूँ,परेशां करता है ये दिल धड़क धड़क के मुझे| राहत इन्दौरी

  • 7th Mar 2022

    जगा दिया तेरी पाज़ेब ने!

    सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे,जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे| राहत इन्दौरी

  • 7th Mar 2022

    बादल-बादल भटकाया हमको!

    आज फिर से मैं एक श्रेष्ठ गीतकार, सरल व्यक्तित्व के धनी और मेरे लिए बड़े भाई जैसे स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| किशन जी प्रेम के अनूठे कवि थे, यह रचना कुछ अलग तरह की है लेकिन उतनी ही प्रभावशाली है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय किशन सरोज जी…

  • 6th Mar 2022

    वो डाली हरी रहे!

    गुज़रो जो बाग से तो दुआ मांगते चलो,जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे। निदा फ़ाज़ली

  • 6th Mar 2022

    दूर ही रहे!

    अपनी तरह सभी को किसी की तलाश थी,हम जिसके भी करीब रहे, दूर ही रहे। निदा फ़ाज़ली

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