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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Mar 2022

    रेशम-ओ-किम्ख्वाब लगे!

    एक चुपचाप सी लड़की, न कहानी न ग़ज़ल,याद जो आये कभी रेशम-ओ-किम्ख्वाब लगे| निदा फ़ाज़ली

  • 5th Mar 2022

    कोई नया ख्वाब लगे!

    कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे,वो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगे| निदा फ़ाज़ली

  • 5th Mar 2022

    गीत फूल-फूले!

    स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| रंजक जी ने नवगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई थी और कुछ अद्भुद नवगीत उन्होंने हमें दिए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत, जो गीतों की मोहकता और प्रभाव विस्तार को लेकर ही है –…

  • 4th Mar 2022

    मिलने-जुलने का हौसला रखना!

    मिलना जुलना जहाँ ज़रूरी हो,मिलने-जुलने का हौसला रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 4th Mar 2022

    घर में कहीं ख़ुदा रखना!

    मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये,अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 4th Mar 2022

    रोने की भी जगह रखना!

    घर की तामीर चाहे जैसी हो,इसमें रोने की भी जगह रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 4th Mar 2022

    पास ही हवा रखना!

    यूँ उजालों से वास्ता रखना,शम्मा के पास ही हवा रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 4th Mar 2022

    जब किसी से कोई-

    जब किसी से कोई गिला रखना,सामने अपने आईना रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 4th Mar 2022

    जिस दिन भी बिछड़ गया मीता!

    आज एक बार फिर से मैं अपने अत्यंत प्रिय गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक प्रेम गीत शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में भारत भूषण जी ने प्रेम की अनूठी अभिव्यक्ति की है| भावुकता का अपना सौन्दर्य है और जो लोग भावुक हैं शायद वे ही इसे समझ सकते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…

  • 3rd Mar 2022

    अंगारे न देख!

    राख़ कितनी राख़ है, चारों तरफ बिख़री हुई,राख़ में चिनगारियाँ ही देख अंगारे न देख । दुष्यंत कुमार

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