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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Apr 2026

    मुझे सोचता कोई और है!

    मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है,सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है| सलीम कौसर

  • 18th Apr 2026

    कौवे-1

    आज श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री नरेश सक्सेना जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नरेश जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नरेश सक्सेना जी की यह कविता– हमारे शहर के कौवे केंचुए खाते हैंआपके शहर के क्या खाते हैं कोई थाली नहीं सजाता कौंवों के…

  • 17th Apr 2026

    दूर की सदा क्या है!

    उदास रात की ख़ामोशियों में ऐ ‘क़ैसर’,क़रीब आती हुई दूर की सदा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 17th Apr 2026

    धुआँ नहीं न सही!

    धुआँ नहीं न सही आग तो नज़र आए,यूँ चुपके चुपके सुलगने से फ़ाएदा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 17th Apr 2026

    तिरी निगाह में लेकिन!

    तुझे पसंद कहाँ हाल पूछना मेरा,तिरी निगाह में लेकिन सवाल सा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 17th Apr 2026

    दूर से दूर तलक -2

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में नीरज जी की इस ग़ज़ल के कुछ और शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था! आशा है आपको यह पसंद आएंगे, धन्यवाद। *******

  • 17th Apr 2026

    रहेगी धूप मिरे सर पे !

    रहेगी धूप मिरे सर पे आख़िरी दिन तक,जवाँ है पेड़ मगर उस का आसरा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 17th Apr 2026

    ये है रेशमी ज़ुल्फों का अंधेरा!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर मेंआशा भोसले जी का गाया ‘मेरे सनम’ फिल्म का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा थ और ओ पी नैयर जी ने इसका संगीत दिया था- ये है रेशमी ज़ुल्फों का अंधेरा न घबराइए! आशा है आपको यह पसंद आएगा,…

  • 17th Apr 2026

    देखूँ कि इंतिहा क्या है!

    अभी तो काट रही है हर एक साँस की धार,अज़ल जब आए तो देखूँ कि इंतिहा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 17th Apr 2026

    दीदी के धूल भरे पाँव!

    आज फिर से मैं विख्यात हिंदी साहित्यकार, संपादक और कवि स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की यह कविता– दीदी के धूल भरे पाँवबरसों के बाद आजफिर यह मन लौटा…

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