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यारों का है मौला खैर!
दुश्मन से तो टक्कर ली है सौ-सौ बार,सामना अबके यारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी
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बोझ अँधियारों का है मौला खैर!
सर पर बोझ अँधियारों का है मौला खैर,और सफ़र कोहसारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी
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गीत के जितने कफ़न हैं!
एक बार फिर मैं आज मेरे लिए गुरुतुल्य और बड़े भाई जैसे रहे, श्रेष्ठ रचनाकार और अत्यंत सरल हृदय गीतकार स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में भी डॉक्टर बेचैन जी ने जीवन पर एक अलग तरीके से निगाह डाली है| लीजिए आज प्रस्तुत है, जीवन पर…
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गुम हो गया हूँ मैं!
ऊपर के चेहरे-मोहरे से धोखा न खाइए,मेरी तलाश कीजिए, गुम हो गया हूँ मैं| निदा फ़ाज़ली
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बिखरता रहा हूँ मैं!
मैं मौसमों के जाल में जकड़ा हुआ दरख़्त,उगने के साथ-साथ बिखरता रहा हूँ मैं| निदा फ़ाज़ली
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मुझे निकाल के पत्थर बना दिया!
मुझसे मुझे निकाल के पत्थर बना दिया,जब मैं नहीं रहा हूँ तो पूजा गया हूँ मैं| निदा फ़ाज़ली
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आप तमाशा रहा हूँ मैं!
देखा गया हूँ मैं कभी सोचा गया हूँ मैं,अपनी नज़र में आप तमाशा रहा हूँ मैं| निदा फ़ाज़ली