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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th May 2022

    चाहता है उसे रास्ता मिले!

    हर शख्स दौड़ता है यहां भीड़ की तरफ,फिर यह भी चाहता है उसे रास्ता मिले| वसीम बरेलवी

  • 11th May 2022

    समंदर से जा मिले!

    क़तरा अब एहतिजाज* करे भी तो क्या मिले,दरिया जो लग रहे थे समंदर से जा मिले|(*विरोध, आपत्ति) वसीम बरेलवी

  • 11th May 2022

    खादी गीत

    स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की कविता एक बार फिर शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय द्विवेदी जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को उल्लेखनीय वाणी दी थी| लीजिए आज प्रस्तुत है, हमारे स्वाधीनता आंदोलन में खादी की विशेष भूमिका को रेखांकित करने वाली स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की कविता –…

  • 10th May 2022

    मेरे पर निकलने लगते हैं!

    बुलन्दियों का तसव्वुर भी ख़ूब होता है,कभी कभी तो मेरे पर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    बचकर निकलने लगते हैं!

    बुरे दिनों से बचाना मुझे मेरे मौला,क़रीबी दोस्त भी बचकर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    धूप पहनकर निकलने लगते हैं!

    हसीन लगते हैं जाड़ों में सुबह के मंज़र,सितारे धूप पहनकर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    घर निकलने लगते हैं!

    पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं,ज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    चाँद-सितारों का है मौला खैर!

    और क़यामत मेरे चराग़ों पर टूटी,झगड़ा चाँद-सितारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    दुनियादारों का है मौला खैर!

    दुनिया से बाहर भी निकलकर देख चुके,सब कुछ दुनियादारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    रिश्तेदारों का है मौला खैर!

    इस दुनिया में तेरे बाद मेरे सर पर,साया रिश्तेदारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी

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