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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Jun 2022

    वो अपना-सा लगता है!

    ऐसा भी इक रंग है जो करता है बातें भी,जो भी इसको पहन ले वो अपना-सा लगता है| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Jun 2022

    हर चेहरा तुम जैसा लगता है!

    कहीं-कहीं से हर चेहरा तुम जैसा लगता है,तुमको भूल न पायेंगे हम, ऐसा लगता है| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Jun 2022

    सारा जग बंजारा होता!

    लीजिए आज एक बार फिर से मैं हिन्दी काव्य जगत में गीतों के राजकुंवर के नाम से विख्यात स्वर्गीय गोपाल दास जी ‘नीरज’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, हिन्दी काव्य साहित्य और हिन्दी फिल्मों में भी उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से अमूल्य योगदान किया…

  • 19th Jun 2022

    दो-चार दुकानों से बनाए रखना!

    दिन को दिन, रात को जो रात नहीं कहते हैं,फ़ासले उनके बयानों से बनाए रखना| एक बाज़ार है दुनिया जो अगर ‘राही जी’,तुम भी दो-चार दुकानों से बनाए रखना| बालस्वरूप राही

  • 19th Jun 2022

    मुमकिन है उड़ानों से बनाए रखना!

    शायरी ख़्वाब दिखाएगी कई बार मगर,दोस्ती ग़म के फ़सानों से बनाए रखना| आशियाँ दिल में रहे आसमान आँखों में,यूँ भी मुमकिन है उड़ानों से बनाए रखना| बालस्वरूप राही

  • 19th Jun 2022

    ठौर-ठिकानों से बनाए रखना!

    जाने किस मोड़ पे मिट जाएँ निशाँ मंज़िल के,राह के ठौर-ठिकानों से बनाए रखना| हादसे हौसले तोड़ेंगे सही है फिर भी,चंद जीने के बहानों से बनाए रखना| बालस्वरूप राही

  • 19th Jun 2022

    दिवानों से बनाए रखना!

    अक़्ल कहती है, सयानों से बनाए रखना,दिल ये कहता है, दिवानों से बनाए रखना| लोग टिकने नहीं देते हैं कभी चोटी पर,जान-पहचान ढलानों से बनाए रखना| बालस्वरूप राही

  • 19th Jun 2022

    सज्जन किसका काम बनाए!

    शिष्टाचार भ्रष्टता दोनों—ने अपने सब द्वैत मिटाए । दुर्जन पार लगाता नैया,सज्जन किसका काम बनाए । बालस्वरूप राही

  • 19th Jun 2022

    जो न बिके मूरख कहलाए!

    तड़क-भड़क संतो की ऐसी,दुनियादार देख शरमाए । जो बिक जाता धन्य वही है,जो न बिके मूरख कहलाए । बालस्वरूप राही

  • 19th Jun 2022

    जहाँ गए जाकर पछताए!

    झूठे जग में सच्चे सुख की,क्या तो कोई आस लगाए । देवालय हो या मदिरालय,जहाँ गए जाकर पछताए । बालस्वरूप राही

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