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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Jun 2022

    जीवन-भर अकुलाए!

    ज्ञान ध्यान कुछ काम न आए,हम तो जीवन-भर अकुलाए । पथ निहारते दृग पथराए,हर आहट पर मन भरमाए । बालस्वरूप राही

  • 19th Jun 2022

    अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ!

    सीनियर बच्चन जी, यानि अमित भइया के पापा स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी ने भी क्या कविता लिख डाली थी- ‘अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ’| दो-दो बार तो लोगों ने इस पर फिल्म बनाई, फिर उसके बाद अब आज की सरकार, जिसने यह जिद पकड़ रखी है कि वो कुछ न कुछ काम करती ही रहेगी| अच्छी सरकार…

  • 18th Jun 2022

    सोग होता है त्योहार सा!

    बात क्या है कि मशहूर लोगों के घर,मौत का सोग होता है त्योहार सा| बशीर बद्र

  • 18th Jun 2022

    घर सजाया गया रात बाज़ार सा!

    गुड़िया गुड्डे को बेचा खरीदा गया,घर सजाया गया रात बाज़ार सा| बशीर बद्र

  • 18th Jun 2022

    कोई होता गुनहगार सा!

    मैं फरिश्तों की सुहबत के लायक नहीं,हमसफ़र कोई होता गुनहगार सा| बशीर बद्र

  • 18th Jun 2022

    बैठा रहूँ मैं गिरफ्तार सा!

    खूबसूरत सी पैरों में ज़ंजीर हो,घर में बैठा रहूँ मैं गिरफ्तार सा| बशीर बद्र

  • 18th Jun 2022

    लगता था दरबार सा!

    अब है टूटा सा दिल खुद से बेज़ार सा,इस हवेली में लगता था दरबार सा| बशीर बद्र

  • 18th Jun 2022

    चमकने लगा है रुख ए यार सा!

    अपना रंगे ग़ज़ल उसके रुखसार सा,दिल चमकने लगा है रुख ए यार सा| बशीर बद्र

  • 18th Jun 2022

    साथ निभना है दुश्वार सा!

    इस तरह साथ निभना है दुश्वार सा,तू भी तलवार सा मैं भी तलवार सा| बशीर बद्र

  • 18th Jun 2022

    इस पार, प्रिये मधु है तुम हो!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के गीत शिरोमणि स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी के इस गीत की मुख्य पंक्ति को अक्सर उद्धृत किया जाता है, इसलिए मुझे लगता है कि इसके संबंध में अधिक बताने की आवश्यकता नहीं है| लीजिए प्रस्तुत है बच्चन जी…

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