Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 21st Jun 2022

    ऐब लगाया लोगों ने!

    तेरी गली में आ निकले थे दोष हमारा इतना था,पत्थर मारे, तोहमत बाँधी, ऐब लगाया लोगों ने| कैफ़ भोपाली

  • 21st Jun 2022

    क्या क्या जुल्म न ढाया लोगों ने!

    हम को दीवाना जान के क्या क्या जुल्म न ढाया लोगों ने,दीन छुड़ाया, धर्म छुड़ाया, देस छुड़ाया लोगो ने| कैफ़ भोपाली

  • 21st Jun 2022

    जिसमें मिला दो लगे उस जैसा!

    आज मैं संतोषानंद जी का एक गीत शेयर करना चाहता हूँ, संतोषानंद जी को मैं लाल किले में राष्ट्रीय दिवसों पर आयोजित कवि-सम्मेलनों के ज़माने से सुनता रहा हूँ, जहां उन दिनों श्री गोपाल प्रसाद व्यास जी आयोजन का संचालन करते थे और जब वे बेटा संतोषानंद कहते हुए उनको आवाज़ लगाते थे तब वे…

  • 20th Jun 2022

    सजाने को मुसीबत नहीं मिलती!

    निकला करो ये शम्अ लिए घर से भी बाहर,तन्हाई सजाने को मुसीबत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Jun 2022

    वैसे भी फुरसत नहीं मिलती!

    हँसते हुए चेहरों से है बाज़ार की ज़ीनत,रोने को यहाँ वैसे भी फुरसत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Jun 2022

    जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती!

    देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद,वो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Jun 2022

    अपनी भी तबियत नहीं मिलती!

    कुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी खफा हैं,हर एक से अपनी भी तबियत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Jun 2022

    इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती!

    दिल में न हो ज़ुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती,खै‍‌‌रात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती| ‍‌ निदा फ़ाज़ली

  • 20th Jun 2022

    शहर अचानक तनहा लगता है!

    और तो सब कुछ ठीक है लेकिन कभी-कभी यूँ ही,चलता-फिरता शहर अचानक तनहा लगता है| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Jun 2022

    कुछ दिन ही अच्छा लगता है!

    तुम क्या बिछड़े भूल गये रिश्तों की शराफ़त हम,जो भी मिलता है कुछ दिन ही अच्छा लगता है| निदा फ़ाज़ली

←Previous Page
1 … 1,207 1,208 1,209 1,210 1,211 … 1,526
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar