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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Jun 2022

    हवाएँ करने लगे!

    लहूलोहान पड़ा था ज़मीं पे इक सूरज,परिन्दे अपने परों से हवाएँ करने लगे| राहत इन्दौरी

  • 22nd Jun 2022

    मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे!

    तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर,ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे| राहत इन्दौरी

  • 22nd Jun 2022

    हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे!

    अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे,चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे| राहत इन्दौरी

  • 22nd Jun 2022

    मंगल विलय!

    एक बार फिर से आज मैं श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, सोम ठाकुर जी के बहुत से गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं| मूलतः वे प्रेम के गीतकार हैं और उनके प्रेम का दायरा इतना बड़ा है कि उसमें राष्ट्र प्रेम, भाषा प्रेम सभी शामिल हो जाते हैं…

  • 21st Jun 2022

    आँख से बस इक बूँद गिरा दी!

    हाय ये उनका तर्ज-ए-मोहब्बत,आँख से बस इक बूँद गिरा दी| कैफ़ भोपाली

  • 21st Jun 2022

    हमारी उम्र बढ़ा दी!

    आपने झूठा वादा कर के,आज हमारी उम्र बढ़ा दी| कैफ़ भोपाली

  • 21st Jun 2022

    कमी थी ताजमहल में!

    एक कमी थी ताजमहल में,मैंने तेरी तस्वीर लगा दी| कैफ़ भोपाली

  • 21st Jun 2022

    शैख़ ने चुपके चुपके दुआ दी!

    झूम के जब रिंदों ने पिला दी,शैख़ ने चुपके चुपके दुआ दी| कैफ़ भोपाली

  • 21st Jun 2022

    घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या!

    घास के घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या,आँधियाँ भी पगली है बर्क भी दिवानी है| कैफ़ भोपाली

  • 21st Jun 2022

    तुझे भी काट गिराया लोगों ने!

    तेरी लटों में सो लेते थे बे-घर आशिक बे-घर लोग,बूढ़े बरगद आज तुझे भी काट गिराया लोगों ने| कैफ़ भोपाली

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