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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Jun 2022

    कोई बात हमारी न आएगी!

    पहचान हमने अपनी मिटाई है इस तरह,बच्चों में कोई बात हमारी न आएगी| बशीर बद्र

  • 17th Jun 2022

    ज़मीन लेके हवाओं के साथ जा!

    सर पर ज़मीन लेके हवाओं के साथ जा,आहिस्ता चलने वाले की बारी न आएगी| बशीर बद्र

  • 17th Jun 2022

    शक्ल हमारी न आएगी!

    तहरीरों गुफ़्तगू में किसे ढूँढ़ते हैं लोग,तस्वीर में भी शक्ल हमारी न आएगी| बशीर बद्र

  • 17th Jun 2022

    कोई सवारी न आएगी!

    छप्पर के चायख़ाने भी अब ऊंघने लगे,पैदल चलो के कोई सवारी न आएगी| बशीर बद्र

  • 17th Jun 2022

    धूल से अटी हुई लारी न आएगी!

    सुनसान रास्तों से सवारी न आएगी,अब धूल से अटी हुई लारी न आएगी| बशीर बद्र

  • 17th Jun 2022

    ख़ुशबू कदम्ब के फूलों की!

    डॉक्टर कुमार शिव, हिन्दी के बहुत श्रेष्ठ गीतकार थे, आकाशवाणी जयपुर में रहते हुए उनके साथ आकाशवाणी की कवि गोष्ठी तथा रिकॉर्डिंग में शामिल होने के भी अवसर प्राप्त हुए थे| उनकी एक पंक्ति जो पहले भी मैंने उद्धृत की थी, वह है – ‘फ्यूज बल्बों के अद्भुद समारोह में, रोशनी को शहर से निकाला…

  • 16th Jun 2022

    सर को छूकर बोलते हैं!

    मेरे ये दोस्त मुझसे झूठ भी अब,मेरे ही सर को छूकर बोलते हैं| राजेश रेड्डी

  • 16th Jun 2022

    ऐसा ही ये मंज़र बोलते हैं!

    नया इक हादिसा होने को है फिर,कुछ ऐसा ही ये मंज़र बोलते हैं| राजेश रेड्डी

  • 16th Jun 2022

    राहों के पत्थर बोलते हैं!

    तेरे हमराह मंज़िल तक चलेंगे,मेरी राहों के पत्थर बोलते हैं| राजेश रेड्डी

  • 16th Jun 2022

    दुनिया कभी घर बोलते हैं!

    सराये है जिसे नादां मुसाफ़िर,कभी दुनिया कभी घर बोलते हैं| राजेश रेड्डी

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