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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Nov 2021

    कोई तेरे जैसा न था!

    मैं तेरी सूरत लिए सारे ज़माने में फिरा,सारी दुनिया में मगर, कोई तेरे जैसा न था| अदीम हाशमी

  • 26th Nov 2021

    मेरे साथ वो रोया न था!

    आज उसने दर्द भी अपने अलहदा कर दिए,आज मैं रोया तो मेरे साथ वो रोया न था| अदीम हाशमी

  • 26th Nov 2021

    तेरा चेहरा न था!

    अक्स तो मौजूद था पर अक्स तनहाई का था,आईना तो था मगर उसमें तेरा चेहरा न था| अदीम हाशमी

  • 26th Nov 2021

    कोई भी आया न था!

    रात भर पिछली ही आहट कान में आती रही,झाँककर देखा गली में कोई भी आया न था| अदीम हाशमी

  • 26th Nov 2021

    छू सकता न था!

    वो के ख़ुशबू की तरह फैला था मेरे चार सू,मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था| अदीम हाशमी

  • 26th Nov 2021

    वो मेरा न था!

    फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा भी न था,सामने बैठा था मेरे, और वो मेरा न था| अदीम हाशमी

  • 26th Nov 2021

    संध्या सिंदूर लुटाती है!

    एक बार फिर से मैं आज हिन्दी काव्य मंचों पर अपने गीतों के माध्यम से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देने वाले स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में बच्चन जी ने शाम के कुछ बहुत सुंदर चित्र प्रस्तुत किए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय…

  • 25th Nov 2021

    आबाद क्या हुए सपने!

    ‘नक़्श’ आबाद क्या हुए सपने,और बरबाद हो गईं आँखें| नक़्श लायलपुरी

  • 25th Nov 2021

    सो गईं आँखें!

    रात कितनी उदास बैठी है,चाँद निकला तो सो गईं आँखें| नक़्श लायलपुरी

  • 25th Nov 2021

    लड़ी में पिरो गईं आँखें!

    दो दिलों को नज़र के धागे से,इक लड़ी में पिरो गईं आँखें| नक़्श लायलपुरी

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