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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Oct 2021

    ये कहानी फिर सही 3

    नफरतों के तीर खाकर, दोस्तों के शहर में,हमने किस किस को पुकारा, ये कहानी फिर सही| मसरूर अनवर

  • 22nd Oct 2021

    ये कहानी फिर सही 2

    दिल के लुटने का सबब पूछो न सबके सामने,नाम आएगा तुम्हारा, ये कहानी फिर सही| मसरूर अनवर

  • 22nd Oct 2021

    ये कहानी फिर सही!

    हमको किसके ग़म ने मारा, ये कहानी फिर सही,किसने तोड़ा दिल हमारा, ये कहानी फिर सही| मसरूर अनवर

  • 22nd Oct 2021

    मैंने उनके भी गिरेबान फटे देखे हैं!

    स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का एक गीत मैं आज शेयर कर रहा हूँ| त्यागी जी काव्य मंच पर अपनी उपस्थिति से अलग प्रकार का वातावरण सृजित करते थे| वे सामान्यतः खुद्दारी से भरी अभिव्यक्ति करते थे, वैसे प्रेम गीत भी उन्होंने बहुत सुंदर लिखे हैं| उनकी कुछ पंक्तियाँ जो अक्सर याद आती हैं, वे हैं…

  • 21st Oct 2021

    दर्द पुराने निकले 5

    कू -ए- क़ातिल में चले जैसे शहीदों का जुलूस,ख़्वाब यूं भीगती आँखों को सजाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद

  • 21st Oct 2021

    दर्द पुराने निकले 4

    दश्त-ए-तन्हाई ए हिजरा में खड़ा सोचता हूं,हाय क्या लोग मेरा साथ निभाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद

  • 21st Oct 2021

    दर्द पुराने निकले 3

    दिल ने एक ईंट से तामीर किया ताजमहल,तूने एक बात कही लाख फसाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद

  • 21st Oct 2021

    दर्द पुराने निकले 2

    फ़स्ल-ए-गुल आई फ़िर एक बार असीनाने-वफ़ा,अपने ही खून के दरिया में नहाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद

  • 21st Oct 2021

    दर्द पुराने निकले!

    चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले,कितने गम थे जो तेरे गम के बहाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद

  • 21st Oct 2021

    सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूं !

    आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| राहत जी अपने सबसे अलग अंदाज़ ए बयां के लिए प्रसिद्ध थे| जो एक अलग प्रकार का ‘पंच’ उनकी रचनाओं में आता था वो पाठकों और श्रोताओं का मन मोह लेता था| लीजिए प्रस्तुत है राहत इन्दौरी साहब…

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