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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Feb 2022

    देखो दुनिया को!

    जागती आँखों से भी देखो दुनिया को,ख़्वाबों का क्या है वो हर शब आते हैं| शहरयार

  • 9th Feb 2022

    तुमसे नाराज़ तो नहीं हूँ मैं!

    आज मैं फिर से अपने अत्यंत प्रिय कवि एवं नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो मुझे अत्यंत प्रिय रहा है| शायद इस गीत का कुछ भाग मैंने पहले भी शेयर किया हो| यह गीत व्यक्ति के आशावाद और जीवट शक्ति को प्रबल अभिव्यक्ति देता है| परेशानियों से हार…

  • 8th Feb 2022

    दामन तर करने अब आते हैं!

    जज़्ब करे क्यों रेत हमारे अश्कों को,तेरा दामन तर करने अब आते हैं| शहरयार

  • 8th Feb 2022

    याद हमें सब आते हैं!

    ऐसे हिज्र के मौसम अब कब आते हैं,तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं| शहरयार

  • 8th Feb 2022

    कोई शख़्स मर गया यारो!

    वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे,सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो| शहरयार

  • 8th Feb 2022

    दरिया उतर गया यारो!

    भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क-ए-आब हुई,चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो| शहरयार

  • 8th Feb 2022

    नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला!

    हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला,हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो| शहरयार

  • 8th Feb 2022

    मैं अपने साये से–

    अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो,मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो| शहरयार

  • 8th Feb 2022

    तन है केवल, प्राण कहाँ हैं !

    हमारी हिन्दी फिल्मों के लिए असंख्य लोकप्रिय गीत लिखने वाले, जनकवि शैलेन्द्र जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| शैलेन्द्र जी ने जो कुछ भी लिखा उसमें उनकी अलग छाप दिखाई देती है| आज की इस कविता में भी कुछ ऐसे गहन भाव हैं जो अभिव्यक्त करते हैं कि जीवन में अभाव कैसे-कैसे…

  • 7th Feb 2022

    सब आसार खलल के हैं!

    क्या दिमाग़ का हाल कहें, सब आसार खलल के हैं। बालस्वरूप राही

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