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औरों को समझाएँगे!
किन राहों से सफ़र है आसाँ कौन सा रस्ता मुश्किल है, हम भी जब थक कर बैठेंगे औरों को समझाएँगे| निदा फ़ाज़ली
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जिस दिन धोका खाएँगे!
अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर-दिल हों मुमकिन है, हम तो उस दिन राय देंगे जिस दिन धोका खाएँगे| निदा फ़ाज़ली
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चार किताबें पढ़ कर ये भी-
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो, चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे| निदा फ़ाज़ली
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वर्ना घर खो जाएँगे!
तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं, देर न करना घर आने में वर्ना घर खो जाएँगे| निदा फ़ाज़ली
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महफ़िल महफ़िल गाएँगे!
तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे, जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनाएँगे| निदा फ़ाज़ली
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उँगलियाँ थाम के खुद!
कल मैंने अपने अग्रज और गुरु तुल्य स्वर्गीय डॉक्टर कुंअर बेचैन जी का जिक्र किया था, उनके बहुत से गीत और कविताएं मैं पहले शेयर की हैं, जब कविता नई नई रुचि पैदा हुई थी तब हम डॉक्टर कुंअर बेचैन जी को बड़े चाव से सुनते थे और अक्सर कवि गोष्ठियों और कवि सम्मेलनों में…
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ज़रा देर को रुलाये मुझे!
बहुत दिनों से मैं इन पत्थरों में पत्थर हूँ, कोई तो आए ज़रा देर को रुलाये मुझे| बशीर बद्र
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अब रेत से उठाए मुझे!
मैं जिसकी आँख का आँसू था उसने क़द्र न की, बिखर गया हूँ तो अब रेत से उठाए मुझे| बशीर बद्र
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हवा से कहो बुझाए मुझे!
अजब चराग़ हूँ दिन रात जलता रहता हूँ, मैं थक गया हूँ हवा से कहो बुझाए मुझे| बशीर बद्र