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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Nov 2022

    तुम्हें याद हो कि न याद हो!

    वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो, वही या’नी वा’दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

  • 27th Nov 2022

    मुहब्बत का घर!

    आज मैं अपने समय में हिन्दी के श्रेष्ठ कवि, संपादक और गीतकार रहे तथा काव्य-मंचों की शोभा बढ़ाने वाले स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की दो ग़ज़लें शेयर कर रहा हूँ| नंदन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह दो ग़ज़लें– तेरा जहान…

  • 26th Nov 2022

    इक दुनिया नई पैदा करें!

    इस पुरानी बेवफ़ा दुनिया का रोना कब तलक, आइए मिल-जुल के इक दुनिया नई पैदा करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    आप कोई दूसरा धंदा करें!

    कीजिएगा रहज़नी कब तक ब-नाम-ए-रहबरी, अब से बेहतर आप कोई दूसरा धंदा करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    बंद अपने घर का दरवाज़ा करें!

    सुन रहा हूँ कुछ लुटेरे आ गए हैं शहर में, आप जल्दी बंद अपने घर का दरवाज़ा करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    दें पर्दे से पर्दे का जवाब!

    जी में आता है कि दें पर्दे से पर्दे का जवाब, हम से वो पर्दा करें दुनिया से हम पर्दा करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    दो दिन में हम क्या क्या करें!

    ये करें और वो करें ऐसा करें वैसा करें, ज़िंदगी दो दिन की है दो दिन में हम क्या क्या करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    जहाँ को न समझ जहान-ए-फ़ानी!

    है अगर हसीं बनाना तुझे अपनी ज़िंदगी को, तो ‘नज़ीर’ इस जहाँ को न समझ जहान-ए-फ़ानी| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    न समझ सकें तो पानी!

    मिरी बे-ज़बान आँखों से गिरे हैं चंद क़तरे, वो समझ सकें तो आँसू न समझ सकें तो पानी| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    कि सँवर गई जवानी!

    तिरा हुस्न सो रहा था मिरी छेड़ ने जगाया, वो निगाह मैंने डाली कि सँवर गई जवानी| नज़ीर बनारसी

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