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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Nov 2022

    यही एक ख़बर लाए हैं!

    लोग यक-रंगी-ए-वहशत से भी उकताए हैं, हम बयाबाँ से यही एक ख़बर लाए हैं| राही मासूम रज़ा

  • 28th Nov 2022

    सुरसा सा मुंह फाड़ रही है!

    आज मैं मेरे लिए गुरु-तुल्य रहे हिन्दी के श्रेष्ठ कवि एवं गीतकार स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की एक सुंदर नवगीत शेयर कर रहा हूँ| बेचैन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का यह नवगीत– गलियों मेंचौराहों परघर-घर में मचे तुफ़ैल-सी।बाल बिखेरे…

  • 27th Nov 2022

    मैं वही हूँ ‘मोमिन’-ए-मुब्तला!

    जिसे आप गिनते थे आश्ना जिसे आप कहते थे बा-वफ़ा, मैं वही हूँ ‘मोमिन’-ए-मुब्तला तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

  • 27th Nov 2022

    वो नहीं नहीं की हर आन अदा!

    वो बिगड़ना वस्ल की रात का वो न मानना किसी बात का, वो नहीं नहीं की हर आन अदा तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

  • 27th Nov 2022

    सो निबाहने का तो ज़िक्र क्या!

    सुनो ज़िक्र है कई साल का कि किया इक आप ने वा’दा था, सो निबाहने का तो ज़िक्र क्या तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

  • 27th Nov 2022

    कभी हम भी तुम भी थे आश्ना!

    कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी, कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

  • 27th Nov 2022

    तो बयाँ से पहले ही भूलना!

    कोई बात ऐसी अगर हुई कि तुम्हारे जी को बुरी लगी, तो बयाँ से पहले ही भूलना तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

  • 27th Nov 2022

    वो बयान शौक़ का बरमला!

    कभी बैठे सब में जो रू-ब-रू तो इशारतों ही से गुफ़्तुगू , वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

  • 27th Nov 2022

    वो नए गिले वो शिकायतें!

    वो नए गिले वो शिकायतें वो मज़े मज़े की हिकायतें, वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

  • 27th Nov 2022

    मुझे सब है याद ज़रा ज़रा!

    वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे बेशतर वो करम कि था मिरे हाल पर, मुझे सब है याद ज़रा ज़रा तुम्हें याद हो कि न याद हो| मोमिन खाँ मोमिन

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