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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Nov 2022

    समझ में जब ये आ जाए तो कहना!

    ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल, समझ में जब ये आ जाए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    दुनिया तुमको रास आए तो कहना!

    ये दुनिया तुमको रास आए तो कहना, न सर पत्थर से टकराए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    डैमोक्रैसी!

    आज एक बार फिर मैं हास्य व्यंग्य के श्रेष्ठ कवि और बहुत अच्छे संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता, जो आज की लोकतान्त्रिक व्यवस्था का बहुत सुंदर…

  • 29th Nov 2022

    ए ज़िंदगी, थोड़ा तो दम ले ले!

    ज़रूर एक नींद मेरे साथ ए मेहमान अ ग़म ले ले,सफ़र दरवेश है ए ज़िंदगी, थोड़ा तो दम ले ले| कैफ़ी आज़मी

  • 29th Nov 2022

    मिरे साथ जलते जलते!

    शब-ए-इंतिज़ार आख़िर कभी होगी मुख़्तसर भी, ये चराग़ बुझ रहे हैं मिरे साथ जलते जलते| कैफ़ी आज़मी

  • 29th Nov 2022

    जो कही गई है मुझ से!

    जो कही गई है मुझ से वो ज़माना कह रहा है, कि फ़साना बन गई है मिरी बात टलते टलते| कैफ़ी आज़मी

  • 29th Nov 2022

    यूँही कोई मिल गया था!

    यूँही कोई मिल गया था सर-ए-राह चलते चलते, वहीं थम के रह गई है मिरी रात ढलते ढलते| कैफ़ी आज़मी

  • 29th Nov 2022

    हमने ख़ुद-कुशी कर ली!

    वो जिनको प्यार है चाँदी से इश्क़ सोने से, वही कहेंगे कभी हमने ख़ुद-कुशी कर ली| कैफ़ी आज़मी

  • 29th Nov 2022

    नज़र मिली भी न थी और !

    नज़र मिली भी न थी और उन को देख लिया, ज़बाँ खुली भी न थी और बात भी कर ली| कैफ़ी आज़मी

  • 29th Nov 2022

    और बंदगी कर ली!

    अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा, ख़ुदा तलाश लिया और बंदगी कर ली| कैफ़ी आज़मी

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