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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Dec 2022

    बेकली इस क़दर नहीं होती!

    हमने सब दुख जहाँ के देखे हैं, बेकली इस क़दर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    हमीं को ख़बर नहीं होती!

    शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती, या हमीं को ख़बर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    कुछ ने कहा चेहरा तेरा!

    कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा, कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा | इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    पवन सामने है नहीं गुनगुनाना!

    आज हिन्दी नवगीत के एक प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मुझे विश्वास है कि वीरेंद्र मिश्र जी का यह सुंदर नवगीत आपको अवश्य प्रभावित करेगा| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का यह नवगीत– पवन सामने है नहीं गुनगुनानासुमन ने कहा पर भ्रमर ने न…

  • 1st Dec 2022

    फिर से बुला ले वो इशारा न रहा!

    क्या बताऊँ मैं कहाँ यूँही चला जाता हूँ, जो मुझे फिर से बुला ले वो इशारा न रहा| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Dec 2022

    मैं भी तुम्हारा न रहा!

    ऐ नज़ारो न हँसो मिल न सकूँगा तुमसे, तुम मिरे हो न सके मैं भी तुम्हारा न रहा| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Dec 2022

    राह दिखा दे वही तारा न रहा!

    शाम तन्हाई की है आएगी मंज़िल कैसे, जो मुझे राह दिखा दे वही तारा न रहा| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Dec 2022

    कोई हमारा न रहा!

    कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा, हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Dec 2022

    ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं!

    ऐसे हंस हंस के न देखा करो सबकी जानिब, लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Dec 2022

    यूँ तो मिला करती हैं सब से आँखें!

    मिलने को यूँ तो मिला करती हैं सब से आँखें, दिल के आ जाने के अंदाज़ जुदा होते हैं| मजरूह सुल्तानपुरी

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